भिकियासैंण स्वास्थ्य केंद्र में बढ़ रही है मरीजों की आमद, सेवा व्यवस्था पटरी पर लौटने की उम्मीद, पूर्व पीपीपी मोड कर्मी बेरोजगारी की मार झेलने को हुए मजबूर।
भिकियासैंण। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भिकियासैंण में मरीजों की संख्या में अब धीरे-धीरे वृद्धि देखी जा रही है। पहले जहां चिकित्सकों की भारी कमी के कारण इलाज कराने वाले लोगों को निराश लौटना पड़ता था, वहीं अब हालातों में बदलाव की बयार महसूस की जा रही है। प्रतिदिन औसतन 200 से 300 मरीज दवा और उपचार हेतु अस्पताल का रुख कर रहे है।
गौरतलब है कि यह अस्पताल पहले पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर संचालित किया जा रहा था, जिसका अनुबंध 31 मार्च को समाप्त हो गया। इसके पश्चात एक अप्रैल से इसे स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्यक्ष रुप से संचालित किया जा रहा है। हालांकि वर्तमान में चिकित्सकों के कुल 10 स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल दो बॉण्डधारी चिकित्सक तैनात है, फिर भी व्यवस्था को पटरी पर लाने के प्रयास तेजी से हो रहे है। हाल ही में सीएमओ अल्मोड़ा कार्यालय द्वारा दो और बॉण्डधारी चिकित्सकों की तैनाती के आदेश जारी किए गए है, जबकि अन्य चिकित्सा इकाइयों से पाँच चिकित्सकों की अस्थायी तैनाती की गई है, जिनमें तीन महिला चिकित्सक शामिल है। नर्सिंग स्टॉफ की बात करें तो मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा से संबद्ध पाँच स्टॉफ नर्सों में से चार ने योगदान कर लिया है, जबकि एक नर्सिंग अधिकारी मातृत्व अवकाश पर है और 17 जून को योगदान देंगी।

लैब व एक्स-रे सेवाएं भी सक्रिय –
अस्पताल में चंदन डायग्नोसिस द्वारा लैब संबंधित सेवाएं दी जा रही है, वहीं एक्स-रे के लिए तकनीशियन की तैनाती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चौखुटिया से कर दी गई है। इसके साथ ही चौखुटिया के डॉ. अमजद खान को भिकियासैंण अस्पताल का प्रभारी नियुक्त किया गया है। पाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अजय तिवारी सहित अन्य चिकित्सक भी अपनी सेवाएं दे रहे है।
धरना प्रदर्शन से जागा शासन-प्रशासन –
सप्ताह पूर्व आम जन संघर्ष समिति के बैनर तले स्थानीय लोगों ने चिकित्सकों की कमी को लेकर धरना प्रदर्शन किया था। जनता के इस दबाव के बाद प्रशासन हरकत में आया और व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे है। अब उम्मीद की जा रही है कि अस्पताल में सामान्य चिकित्सा सेवाएं जल्द सुचारु रुप से चलने लगेंगी।
बेरोजगार हुए पीपीपी मोड के 65 कर्मी –
इस बदलाव का एक दूसरा पहलू यह भी है कि पीपीपी मोड में कार्यरत लगभग 65 स्वास्थ्यकर्मी एकाएक बेरोजगार हो गए है। ये कर्मी वर्षों से अस्पताल में विभिन्न सेवाएं दे रहे थे, और अब उनके समक्ष रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सरकार से इन कर्मचारियों के पुनर्वास की मांग जोर पकड़ रही है। भिकियासैंण अस्पताल में धीरे-धीरे चिकित्सा सेवाएं बहाल हो रही है। जनआंदोलन, विभागीय सक्रियता और स्थानीय सहयोग से एक बार फिर यह स्वास्थ्य केंद्र आमजन की उम्मीदों का केंद्र बन सकता है, बशर्ते शासन-प्रशासन लगातार निगरानी और सुधार की दिशा में तत्पर रहे।
रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण










