महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता में मतदाता जागरुकता कार्यक्रम हुआ आयोजित।

नानकमत्ता (उधम सिंह नगर)। महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता में अगस्त माह की थीम “स्वतंत्रता का पर्व, लोकतंत्र का गर्व” के अंतर्गत मतदाता जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से क्विज़ प्रतियोगिता, एवं नुक्कड़ नाटक आयोजित किए गए। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों ने स्वतंत्रता, लोकतंत्र और मताधिकार की महत्ता को रचनात्मक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्य प्रो. अंजला दुर्गापाल द्वारा किया गया, जिसके पश्चात विभिन्न प्रतियोगिताओं का संचालन महाविद्यालय के प्राध्यापकों के निर्देशन में हुआ।

इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. अंजला दुर्गापाल ने अपने उद्बोधन में कहा, स्वतंत्रता केवल राजनीतिक मुक्ति का नाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक चेतना का प्रतीक है। लोकतंत्र तभी सार्थक होता है जब उसका प्रत्येक नागरिक सक्रिय रुप से भाग ले और अपने मताधिकार का प्रयोग ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ करें। आज की युवा पीढ़ी केवल भविष्य की आधारशिला ही नहीं है, बल्कि वर्तमान की भी शक्ति है। यदि युवा अपने मतदान अधिकार और अन्य कर्तव्यों के प्रति सजग होंगे, तभी हम एक सशक्त, जिम्मेदार और प्रगतिशील भारत का निर्माण कर पाएंगे।

इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. विद्या शंकर शर्मा ने कहा, लोकतंत्र की आत्मा नागरिकों की सजगता और भागीदारी में निहित है। जब प्रत्येक नागरिक मतदान के अधिकार का प्रयोग करता है, तभी लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ प्रकट होता है। हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि लोकतंत्र केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति है, जिसमें पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सामाजिक न्याय के सिद्धांत अंतर्निहित हैं। विद्यार्थियों का यह कर्तव्य है कि वे समाज को जागरुक करने के लिए स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करें और अधिक से अधिक लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ें।

इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. निवेदिता अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने जिन आदर्शों की रक्षा हेतु अपने प्राण न्यौछावर किए, उनमें सबसे महत्वपूर्ण था लोकतंत्र की स्थापना। लोकतंत्र की सफलता मतदाता की जागरुकता और नैतिक जिम्मेदारी पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को यह समझना होगा कि मतदान केवल अधिकार नहीं बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। आज के विद्यार्थी अपने परिवार और समाज में मतदाता जागरुकता के प्रवक्ता बनकर इस जिम्मेदारी का निर्वहन कर सकते हैं।

इस अवसर पर हिंदी विभाग प्रभारी डॉ. निशा आर्य ने कहा, स्वतंत्रता और लोकतंत्र परस्पर अविभाज्य हैं। यदि स्वतंत्रता मनुष्य की आत्मा है तो लोकतंत्र उसका शरीर है। स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है जब हर नागरिक लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें और समाज में समानता, न्याय तथा बंधुत्व की भावना का संवर्धन करें। युवाओं का यह नैतिक दायित्व है कि वे समाज में लोकतंत्र की चेतना का संचार करें और विशेषकर मतदान प्रक्रिया में अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करें।

इस अवसर पर इतिहास विभाग प्रभारी डॉ. दर्शन सिंह मेहता ने कहा, इतिहास हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता और लोकतंत्र सहज रुप से प्राप्त नहीं हुए हैं, बल्कि इसके लिए असंख्य बलिदान और संघर्ष किए गए। आज जब हम लोकतंत्र की छत्रछाया में जीवन जी रहे हैं, तब यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस धरोहर को और अधिक सुदृढ़ बनाएं। लोकतंत्र को जीवंत और सशक्त बनाने के लिए मतदान प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। युवा वर्ग को चाहिए कि वे लोकतंत्र की इस धारा को आगे बढ़ाने में मतदान प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाएं।

इस अवसर पर राजनीति शास्त्र विभाग प्रभारी डॉ. रवि जोशी ने कहा, लोकतंत्र की संकल्पना मात्र शासन व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समग्र सामाजिक दृष्टिकोण है जिसमें स्वतंत्रता, समानता, न्याय और सहभागिता के मूल्य निहित हैं। मतदाता लोकतंत्र का सबसे बड़ा स्तंभ है और उसकी सजगता ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जीवंत रखती है। जब युवा वर्ग मतदान को केवल अधिकार नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व मानकर आगे बढ़ेगा, तभी भारत विश्व के समक्ष एक आदर्श लोकतांत्रिक राष्ट्र के रुप में स्थापित होगा।

प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। क्विज़ प्रतियोगिता में पहला स्थान रमनदीप कौर एवं नीरु गोस्वामी की टीम ने, दूसरा स्थान जसपाल सिंह एवं निशा भट्ट की टीम ने और तीसरा स्थान भावना राणा एवं रजविंदर कौर की टीम ने प्राप्त किया। नुक्कड़ नाटक आयोजन में बीए के नीरू गोस्वामी, खुशबू राणा, विनीता, निशा भट्ट, जसपाल सिंह, सिया चन्द, भावना राणा, हिमानी बोहरा, उदय तिवारी, जसप्रीत कौर शामिल रहे।

सभी वक्ताओं ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता का पर्व तभी सार्थक है जब लोकतंत्र का प्रत्येक नागरिक जागरुक होकर अपने अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन करें।

इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. विद्या शंकर शर्मा, डॉ. निवेदिता अवस्थी, डॉ. चम्पा टम्टा, डॉ. उमेश जोशी, डॉ. स्वाति पंत, डॉ. निशा परवीन, डॉ. मंजुलता जोशी, डॉ. दर्शन सिंह मेहता, डॉ. शशि प्रकाश सिंह, डॉ. निशा आर्या, डॉ. आशा गढ़िया, डॉ. रवि जोशी, महेश कन्याल, राम जगदीश सिंह, विपिन थापा, सुनील कुमार, नीरु गोस्वामी, खुशबू राणा, विनीता, निशा भट्ट, जसपाल सिंह, सिया चन्द, भावना राणा, हिमानी बोहरा, उदय तिवारी, जसप्रीत कौर आदि उपस्थित रहे।

रिपोर्टर- रिया सोलीवाल

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