बागेश्वर के विकासखंड कपकोट सभागार में यूकॉस्ट की एक दिवसीय कार्यशाला हुई आयोजित।

बागेश्वर। विकासखंड कपकोट मुख्यालय के सभागार में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) तथा जड़ी-बूटी एवं पर्यावरण शोध समिति के संयुक्त तत्वाधान द्वारा “हिमालयी जैव विविधता संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन तथा मानव वन्य जीव संघर्ष” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह दानू ने दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य वक्ता गिरीश सिंह बिष्ट ने कहा कि इस क्षेत्र में वृक्ष प्रजातियों की समृद्धि को वार्षिक औसत तापमान और ऊंचाई की चौड़ाई के संयोजन से सबसे अच्छी तरह संरक्षित किया जा सकता है।

हिमालय 36 जैव विविधता वाले हॉटस्पॉट में से एक है, जहां लगभग 3,160 दुर्लभ, स्थानिक और संवेदनशील पौधों की किस्में हैं, जिनमें विशेष औषधीय गुण मौजूद हैं।पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को बनाए रखने के लिए इसकी जैव विविधता को संरक्षित करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 117 स्थानिक और 88 संकटग्रस्त प्रजातियों की जानकारी प्रदान की गई है। वक्ताओं में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोविंद सिंह दानू ने कहा कि आधुनिक समय में तेज़ी से हो रहे शहरीकरण और औद्योगीकरण ने वन भूमि को गैर-वन उद्देश्यों वाली भूमि में परिवर्तित कर दिया है, जिसके परिणामस्वरुप वन्यजीवों के आवास क्षेत्र में कमी आ रही है। संरक्षित क्षेत्रों की परिधि के पास कई मानव बस्तियाँ स्थित हैं और स्थानीय लोगों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण से वनों के सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है जिससे मानव वन्य जीव संघर्ष सामने आने लगते है। स्थानीय समुदायों की पूर्ण भागीदारी मानव-पशु संघर्ष को कम करने और मनुष्यों एवं वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ाने में मदद कर सकती है।

कार्यक्रम में पहुंचे दूरस्थ क्षेत्रों की महिला संगठन की पदाधिकारियों ने भी मानव वन्य जीव संघर्ष पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसमें उन्होंने कहा कि यह सामुदायिक सहभागिता व वन विभाग के परस्पर सामंजस्य से वनों को अगर संरक्षित किया जाएगा तथा उन्हें आग से बचाया जायेगा तो अवश्य ही इस मानव वन्य जीव संघर्ष के आंकड़ों में कमी आएगी। वक्ताओं में कार्यक्रम की अध्यक्षता खंड विकास अधिकारी ख्याली राम ने की, उन्होंने यूकॉस्ट का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विकासखंड कपकोट राज्य के अत्यंत सुदूरवर्ती क्षेत्रों में से है, जहां ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहे है जिससे समस्त नागरिकों को हिमालयी जैव विविधता तथा मानव वन्य जीव संघर्ष की जानकारी मिलती रहे।

उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद का भी इस कार्यशाला के आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया गया। संस्था के सचिव सुभाष बिष्ट ने कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त विकासखंड अंतर्गत जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख गोविंद सिंह, विशिष्ट अतिथि ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख हरीश मेहरा, सहायक खंड विकास अधिकारी विपिन चंद्र उपाध्याय, एडिओ (पंचायत) स्वरुप सिंह चोब्याल, एनआरएलएम बीबीएम प्रकाश थपलियाल, सहायक उद्यान विभाग अधिकारी नंदन सिंह गड़िया, सहायक कृषि विभाग चंद्र प्रकाश व अधिकारी वर्ग व समस्त कर्मचारी, स्थानीय नागरिक आदि सहित समस्त स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष बिष्ट द्वारा किया गया।

रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण

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