बागेश्वर के पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज गरुड़ में यूकॉस्ट द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला हुई आयोजित।
बागेश्वर। विकासखंड गरुड़ के पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) तथा जड़ी-बूटी एवं पर्यावरण शोध समिति के संयुक्त तत्वाधान द्वारा “हिमालयी जैव विविधता संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन तथा मानव वन्य जीव संघर्ष” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मुख्य वक्ता जगमोहन सिंह बिष्ट ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि हिमालय में सतह के औसत तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि हुई है और इसके कारण हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे है, जो फिर तीव्र गति से पीछे हट रहे है। हिमालय में जलवायु परिवर्तन से जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है तथा ग्लेशियरों के पिघलने से जीव-जंतुओं को अपने आवासों से हाथ धोना पड़ रहा है, जिससे वह मानव आवासीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे है। यही से मानव वन्य जीव संघर्ष का आँकड़ा बढ़ रहा है।

वक्ताओं में वन अधिकारी पूजा भंडारी ने कहा कि संरक्षित क्षेत्रों की परिधि के पास कई मानव बस्तियाँ स्थित हैं और स्थानीय लोगों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण से वनों के सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे मानव वन्य जीव संघर्ष सामने आने लगते है। स्थानीय समुदायों की पूर्ण भागीदारी मानव-पशु संघर्ष को कम करने और मनुष्यों एवं वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व को बढ़ाने में मदद कर सकती है। विद्यालय की छात्र-छात्राओं ने भी जलवायु परिवर्तन पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जिसमें उन्होंने कहा कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियर तेज़ी से पिघल रहे है, इससे हिमालयी क्षेत्रों में बाढ़ व बादल फटने जैसे घटनाओं की बारंबारता बढ़ रही है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य गिरीश नेगी जी ने की, उन्होंने यूकॉस्ट का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विद्यालय में ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहे, जिससे छात्र-छात्राओं को संस्कृति, विज्ञान व तकनीकी की जानकारी बनी रहे। उत्तराखण्ड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद का भी इस कार्यशाला के आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया गया। संस्था के सचिव सुभाष सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त विद्यालय के छात्र-छात्राओं व शिक्षकों, कृषि, वन विभाग अधिकारी वर्ग का धन्यवाद किया। कार्यक्रम सहायक कृषि अधिकारी मनीषा आर्या, वन अधिकारी अनुराधा जोशी, शिक्षक मीना राठौर, एम. एस. बिष्ट, एम. पी. भट्ट, कैलाश सनवाल, एम. सी. जोशी, कैलाश जोशी, आदित्य पंत, मंजू जोशी आदि सहित ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का संचालन डी. एस. मेहरा द्वारा किया गया।



