उत्तराखंड संस्कृत अकादमी हरिद्वार द्वारा बीआरसी जैनल में दो दिवसीय कार्यक्रम हुए आयोजित।
भिकियासैंण। उत्तराखण्ड संस्कृत अकादमी हरिद्वार के द्वारा आयोजित दो दिवसीय संस्कृतच्छात्र प्रतियोगिता का शुभारंभ खण्ड शिक्षा अधिकारी डॉ. रवि मेहता के निर्देशन में विकासखण्ड भिकियासैंण के बीआरसी सभागार जैनल में हुआ। मुख्य अतिथि माधवानन्द बौड़ाई सेवानिवृत्त संस्कृत प्रवक्ता, कार्यक्रम संयोजिका श्रीमती तारा बुधोड़ी, प्रशान्त तिवारी व बालादत्त शर्मा ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्वलित कर सरस्वती माँ की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर प्रथम दिवस कनिष्ठ वर्ग कक्षा 6 से 10 तक के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत समूहगान, संस्कृत समूह नृत्य, संस्कृत नाटक, आशुभाषण, वाद-विवाद, श्लोकोच्चारण प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। संस्कृत भाषा में गीत – संगीत और श्लोक गायन ने श्रोताओं को मन्त्र मुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि माधवानन्द बौड़ाई ने संस्कृत भाषा के व्यापक साहित्य पर विस्तृत रुप से प्रकाश डालते हुए भारतीय संस्कृति की मूल संस्कृत भाषा की उपयोगिता को महत्वपूर्ण बताया। ब्लॉक संयोजिका तारा बुधोड़ी ने संस्कृत प्रतियोगिताओं की रुपरेखा सामने रखी तथा प्रतियोगिता के नियमों से अवगत कराया।

संस्कृत प्रवक्ता बालादत्त शर्मा ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं और उन्हें तैयार कराने वाले दल शिक्षक-शिक्षिकाओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विद्यालयों में संस्कृत भाषा कक्षा 8 तक अनिवार्य विषय और कक्षा 12 तक वैकल्पिक विषय के रुप में पढ़ाई जाती है, लेकिन 95 प्रतिशत विद्यालयों में एलटी संवर्ग में शिक्षक ही नहीं है। हिन्दी, कला, व्यायाम शिक्षक आदि असंगत विषयों के शिक्षकों के द्वारा ही अस्थाई व्यवस्था के रुप में संस्कृत भाषा पढ़ाई जा रही है जिस कारण विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा नीरस और अरुचिकर लगने लगी है। राज्य में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा के रुप में मान्यता प्राप्त है। राज्य में पृथक संस्कृत मंत्रालय होने के बावजूद विद्यालयी शिक्षा में संस्कृत भाषा की बड़ी उपेक्षा हो रही है। संस्कृत भाषा को रुचिकर बनाने के लिए संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए और संस्कृत को रोजगार परक बनाकर शासकीय कार्यालयों में इसके अनुवादकों के पदसृजित किए जाने चाहिए।

संस्कृत प्रवक्ता प्रशान्त तिवारी ने संस्कृत भाषा शिक्षण हेतु शिक्षकों के अभाव चलते हुए भी प्रतियोगिताओं के लिए बच्चों को प्रेरित करने वाले दल शिक्षकों का धन्यवाद दिया तथा संस्कृत भाषा के प्राचीन ग्रन्थों, नीति शास्त्र, इतिहास-पुराण, वेदोपनिषद आदि के महत्व पर प्रकाश डाला। नाटक प्रतियोगिता में क्रमशः रा.उ.मा.वि. थापला ने प्रथम, रा.इ.का. बिनोली-सटेड़ ने द्वितीय, रा.इ.का. खरखीना ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। समूहगान में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय थापला, सनराइज कॉन्वेंट स्कूल भिकियासैंण प्रथम-द्वितीय-तृतीय स्थान पर रहे। समूहनृत्य में राजीव नवोदय थापला और सनराइज भिकियासैंण पहले-दूसरे-तीसरे स्थान पर रहे। वाद-विवाद प्रतियोगिता में अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कॉलेज चौनलिया प्रथम, खरखीना द्वितीय और रा.इ.का. पन्तस्थली प्रथम-द्वितीय-तृतीय स्थान पर रहे। श्लोकोच्चारण में रा.इ.का. जीनापानी, नवोदय विद्यालय चौनलिया, इंटर कॉलेज बासोट ने प्रथम-द्वितीय-तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इस मौके पर डॉ. महेश दुर्गापाल, नवीन तिवारी, हिमांशु पन्त, पुष्पा लखचौरा, अशोक कुमार, कृष्णा जोशी, जगदीश पपनै का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अभिलेखीकरण में ललित मोहन जोशी, रविन्द्र मेहरा, राजेन्द्र सती ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम को सफल बनाने में टीका सिंह डंगवाल, आनन्द सिंह नेगी, प्रमोद कुमार दुर्गापाल, दीपक कुमार, हंसा आर्या, दीप्ति जोशी, गीता सती, लता चौधरी, रेखा, ललित कैड़ा, सुनील कुमार, भावना जोशी, आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन बालादत्त शर्मा और प्रशान्त तिवारी ने किया। वहीं कल 16 अक्टूबर को वरिष्ठ वर्ग की प्रतियोगिताएं आयोजित की जानी है।



