साइबर ठगी से बर्बाद हो रहे हैं कई परिवार, समाज में सतर्कता की अत्यधिक आवश्यकता।

रातों रात अमीर बनने की इच्छा का त्याग कर मेहनत के मार्ग में चलने के लिए प्रेरित करना है जरुरी।

डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह पड़ियार
सहायक प्राध्यापक गणित
राजकीय महाविद्यालय खटीमा उत्तराखंड

खटीमा। आजकल साइबर क्राइम और ठगी की घटनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। समाचार पत्रों के माध्यम से हम इन घटनाओं के बारे में अक्सर पढ़ते हैं, लेकिन इसके पीछे केवल तकनीकी कारण नहीं हैं, बल्कि एक गहरे मनोवैज्ञानिक पहलू का भी हाथ है। सोशल मीडिया, इंटरनेट, और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने जहाँ लोगों को एक दूसरे से जोड़ने में मदद की है, वहीं दूसरी ओर यह ठगों के लिए एक अच्छा अवसर बन गए हैं। इसलिए समाज के विभिन्न वर्गों जैसे कि युवाओं, महिलाओं और व्यवसायियों के बीच इस विषय पर लगातार जागरुकता बढ़ाने के कार्यक्रमों का आयोजन करना अत्यधिक आवश्यक हो गया है। क्योंकि मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है कि वह जल्दी समृद्धि प्राप्त करना चाहता है और यश की आकांक्षा करता है। इसके लिए धन एक मुख्य मार्ग में से एक अवश्य बनता है, और यही सोच ठगों के लिए एक बेहतरीन अवसर प्रदान करती है। किसी भी कार्य के लिए हम स्वयं उत्तरदायी होते हैं। हमारी सोच, हमारा आकर्षण और हमारी इच्छाएँ अब हम तक ही सीमित नहीं रहती है।

ए. आई. के दौर में हमारी व्यक्तिगत चीजें भी अब हमारी नहीं रह जाती। यह आभास हमें बहुत जल्दी हो जाता है। आजकल हम अपने मोबाइल फोन में एप्लिकेशन डाउनलोड करते हैं और पाते हैं कि कुछ व्यक्तिगत जानकारी के लिए परमिशन मांगी जाती है लेकिन हम बिना सोचे-समझे हम हर चीज पर ‘अलाऊ’ क्लिक करते जाते हैं, चाहें वह कैमरा हों, कॉल डिटेल्स हों, कॉन्टैक्ट लिस्ट हों या कोई और चीज़ जिसे हम गूगल में सर्च करते है। कई बार हम गूगल में जो सर्च करते है उसका विज्ञापन हमें अन्य जगह खुद ही दिखने लगता है। ये तकनीकी दुनिया का ही कमाल है परंतु उपयोग करने वाला कैसे करते है ये उन पर ही निर्भर करता है और हम लोग बिना सोचे समझे अपनी अनुमति पहले ही दे देते है। साइबर ठग इन जानकारियों का गलत उपयोग करते हैं और अपने शिकार को जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर धोखा देते हैं। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर अक्सर ऐसे विज्ञापन या संदेश दिखते हैं, जिनमें किसी व्यक्ति द्वारा जल्दी पैसे बनाने का दावा किया जाता है। इस प्रकार की योजनाएँ उस व्यक्ति की लालच को भड़काती हैं जो जीवन में जल्दी सफलता प्राप्त करना चाहता है।

मनोविज्ञान के अनुसार, जब लोग इन आकर्षक प्रस्तावों को देखते हैं, तो वे गहरे भावनात्मक रुप से जुड़ जाते हैं और तर्कसंगत सोचने के बजाय तुरंत निर्णय लेते हैं। एक अध्ययन (Psychology Today, 2020) में पाया गया है कि लोग उन योजनाओं पर जल्दी विश्वास कर लेते हैं जो उन्हें ‘ऑल-इन-वन’ या ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट’ जैसे आकर्षक वादे दिखाती हैं। ठग इन योजनाओं को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि वे आकर्षक और आसान लगें, जबकि असल में ये एक बड़ा धोखा होता है। साइबर क्राइम में विभिन्न प्रकार के धोखाधड़ी के तरीक़े होते हैं जैसे कि फिशिंग (Phishing), जिसमें ठग एक फर्जी वेबसाइट बनाकर, ईमेल भेजकर आपकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे बैंक डिटेल्स या पासवर्ड चुराते हैं। ये वेबसाइटें अक्सर एक बैंक या प्रसिद्ध वेबसाइट की नकली प्रतिकृति होती हैं, जिन पर लोग जल्दी विश्वास कर लेते हैं। इसके बाद क्लोनिंग (Cloning) होता है, जिसमें ठग किसी व्यक्ति या संस्था की सोशल मीडिया प्रोफाइल को क्लोन कर, उनके नाम से पैसे ऐंठते हैं। वे शिकार को यह विश्वास दिलाते हैं कि वह व्यक्ति स्वयं उनसे संपर्क कर रहा है। इन्वेस्टमेंट स्कीम्स (Investment Scheme) के तहत ठग आकर्षक निवेश योजनाओं के माध्यम से पैसे जुटाते हैं, जैसे कि ‘ब्लू चिप’ या ‘ऑल-इन-वन’ निवेश आदि योजनाएँ।

शेयर मार्केट की दुनियां में ले जाने के सपने दिखाना और उन्हें डिस्काउंट में शेयर दिलाने का लालच भी प्रमुख है और इस तरह की योजनाओं में उच्च रिटर्न का वादा किया जाता है, और कभी-कभी फर्जी प्रमाण भी दिए जाते हैं ताकि लोग इन पर विश्वास करें। ये कार्य सब उन कंपनी के नाम पर ही होता है जो कहीं न कहीं सरकारी कागजों में पंजीकृत है परंतु ये वास्तव में वो नहीं होते इसलिए निवेश कभी भी सीधे कंपनी के खाते में नहीं किया जाता बल्कि थर्ड पार्टी के अकाउंट में पैसे डलवाकर स्कैम होता है। कई बार जो पुराने पैसे है उन्हें निकालने के लिए एक कंडीशन रख दी जाती है कि इतना पैसा सर्विस के रुप में जमा कर दीजिए फिर अपना पैसा निकाल सकते है और इस तरह दलदल में लोग फसते जाते है, डेटा ब्रीच (Data Breaches) में ठग व्यक्तिगत जानकारी चुराकर उसे बेचते हैं, जिससे लोगों का वित्तीय और व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में पड़ जाता है। इन सब की शुरुआत हमेशा एक ‘सारथी’ से होती है, जो ठग की दुनिया की इस रंगभूमि में अपने रथी का रथ को चलाने में सहायक बनता है और यह सारथी आपको विजय होने की दिलाशा दिलाकर आपको अमीर बनने का मार्गदर्शन करने का परम ज्ञान प्रदान करता है और यह विश्वास दिलाता है कि अगर आप उनकी योजना कुशल नीति और बताए रास्ते में चलेंगे तो अपनी विजय निश्चित है और आप भी जल्दी सफलता प्राप्त करेंगे। जब आप उनके साथ जुड़ते हैं और पैसे निवेश करते हैं, तो ठग धीरे-धीरे आपको और अधिक निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं। यह प्रक्रिया इतनी आकर्षक होती है कि उनके द्वारा दिया गया ज्ञान लोगों को लगता है यहीं अंतिम सत्य है और खुद को उनकी योजनाओं पर समर्पित कर देते है और लोग बिना किसी वास्तविक प्रमाण या योजना के ही आगे बढ़ते रहते हैं।

कई बार, व्यक्ति अपनी इच्छाओं के कारण इन ‘सारथियों’ पर विश्वास कर बैठता है क्योंकि इच्छा ही दु:ख का कारण है। इस संसार में इच्छा न हों तो दु:ख का आभास ही नहीं हों इसलिए इन इच्छाओं की पूर्ति हेतु लोग ठगों के बताए मार्ग में चलते है, लेकिन एक दिन जब सत्य से सामने होता है, तो लोगों को यह अहसास होता है कि इस रथ का पहिया धस गया, सारथी भाग गया, ज्ञान का विश्मरण हो गया है और बिना तैयारी और सही जानकारी के इस धोखाधड़ी के जाल में फंस चुके हैं और अब आपके पास कुछ भी नहीं बचा है। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं रहा, यह स्थिति लोगों के लिए बेहद निराशाजनक होती है, क्योंकि जब उनका पैसा चला जाता है, तो उसे वापस पाने का कोई रास्ता नहीं होता है। सिर्फ एक चीज हाथ रह जाती है और वो है पछतावा।

साइबर क्राइम से जुड़ी घटनाओं के दर्ज होने के बाद कई लोग अपना करोड़ों का नुकसान कर चुके हैं, जबकि कई ऐसे भी होते हैं जो लाखों रुपये गंवा देते हैं जो उन्होंने बहुत मेहनत से जमा किए होते हैं। इस स्थिति से बचने के लिए हमें सतर्कता और जागरुकता की आवश्यकता है। हमें इंटरनेट पर किसी भी निवेश या ऑफ़र के बारे में जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। किसी भी ऑनलाइन सौदे या निवेश से पहले उसकी वैधता और सुरक्षा की जाँच करनी चाहिए। साथ ही हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से ही निवेश करें और केवल प्रमाणित और भरोसेमंद संस्थाओं से ही कोई लेन-देन करें और साथ ही किसी भी प्रकार की इन्वेस्टमेंट और अन्य गतिविधियों को लेकर अपने परिवार में विचार विमर्श करना चाहिए ताकि सत्यता की जाँच करने में सहायता के साथ-साथ परिवार के लोग सही और गलत दिशा का बोध भी करा सकें, उन्हे ये मौका हमेशा देना चाहिए। इसके साथ ही व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के प्रति सजग रहना भी अत्यंत आवश्यक है। अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग डिटेल्स को सुरक्षित रखें, फर्जी वेबसाइटों से बचें और केवल उन वेबसाइटों पर लॉगिन करें जो सुरक्षित और प्रमाणित हों।

आज जहां साइबर क्राइम का खतरा लगातार बढ़ रहा है, इसका मुकाबला केवल तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि हमारी मानसिकता और सतर्कता से भी किया जा सकता है। इसके लिए जरुरी है कि हम जल्दबाजी में अमीर बनने के सपने से बचें और डिजिटल दुनिया में सुरक्षित तरीके से कदम रखें। इसके साथ-साथ एक अलग तरह का ब्लैक मेलिंग सुनने को मिलती है जिसमें कुछ महिलाएँ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पुरुषों को निशाना बना रही हैं, खासकर वे जो गलत साहित्य में रुचि रखते हैं या अकेले रहते है या फिर परिवार से दूर रहते है। ये सब कार्य बहुत सोच समझकर लोग कर रहे है और मूर्ख बनाकर पैसा कमाने के नए-नए अजीब और अनैतिक मार्ग तलाश रहे है। ये महिलाएँ धीरे-धीरे लड़कों से संपर्क करती हैं, मित्रता का आभास देती हैं और फिर उन्हें अश्लील साहित्य और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भेजने के लिए प्रेरित करती हैं। वीडियो कॉल के माध्यम से लड़कों से आपत्तिजनक हरकतें करवाई जाती हैं और फिर उन्हें रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया जाता है। यह सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। ये सारे कार्य वीडियो कॉल के माध्यम से होते है जिसमें लड़कों का चेहरा स्पष्ट दिखता हों। कई युवा अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान को बचाने के लिए इन ब्लैकमेलरों द्वारा मांगी गई राशि देने के लिए विवश हो जाते हैं, बजाय इसके कि वे इस स्थिति का खुलासा करें। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है, जब तक इन युवाओं के पास कुछ बचा नहीं रहता। इसलिए युवाओं को इस प्रकार के ब्लैकमेलिंग से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है और उन्हें सही और गलत की पहचान करवाना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, ताकि वे इस प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें और किसी भी अनजान व्यक्ति से वीडियो कॉल या संदेशों के माध्यम से बात करने से बचे रहे।

आज के समय में आत्महत्या की घटनाएँ भी बढ़ रही हैं, कई के कारण पता चलते है, कई के नहीं। ब्लैकमेलिंग और साइबर ठगी के माध्यम से कितनी आत्महत्याएं हुई ये डेटा एनलाइसिस का विषय है परंतु इन सब के कारण जो मानसिक तनाव और उस से आमंत्रित बीमारियां अपने आप में बहुत बर्बादी का कारक है। इसलिए हमें प्रयास करना चाहिए कि हम अपने आस-पास के लोगों को, जो भी हमारे संपर्क में हैं, जागरुक करें और उन्हें साइबर ठगी और ब्लैक मेलिंग जैसी हरकतों से बचने के लिए सलाह दें।

रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *