भिकियासैंण–विनायक के शेलापानी में हुए बस हादसे का आखिर जिम्मेदार कौन? — यूकेडी नेता तुला सिंह तड़ियाल।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता तुला सिंह तड़ियाल ने एक जारी बयान में भिकियासैंण–विनायक क्षेत्र के शेलापानी में हाल ही में हुए भीषण बस हादसे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक दुर्घटना के बाद सरकार जन आक्रोश से बचने के लिए केवल औपचारिक रुप से मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश जारी कर देती है, लेकिन आज तक किसी भी जांच का कोई ठोस और निर्णायक परिणाम सामने नहीं आया है।
तुला सिंह तड़ियाल ने कहा कि बीते चार वर्षों से भिकियासैंण–विनायक–द्वाराहाट मोटर मार्ग पर जीओ कंपनी द्वारा जगह-जगह सड़क काटकर केबल बिछाई गई, लेकिन आज तक उन गड्ढों को नहीं भरा गया। जबकि जीओ कंपनी द्वारा इसकी क्षतिपूर्ति संबंधित विभाग को पहले ही की जा चुकी है। इन गड्ढों के कारण इस मार्ग पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और अब यह बड़ा हादसा सामने आया है, जिसमें 07 लोगों की मौत हो गई तथा 12 लोग गंभीर रुप से घायल हो गए। घायलों का उपचार विभिन्न शहरों में चल रहा है, जबकि 02 घायलों की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें एयरलिफ्ट कर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश ले जाया गया।
उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना के लिए भी जीओ कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गाड़ी के गड्ढे से उछलने के बाद स्टेयरिंग में तेज आवाज आई और उसके बाद स्टेयरिंग ने काम करना बंद कर दिया, जिससे बस लगभग 80 फीट गहरी खाई में जा गिरी। उन्होंने बताया कि दुर्घटनास्थल पर तीखा मोड़ था, लेकिन विभाग द्वारा वहां किसी प्रकार की सेफ्टी वॉल का निर्माण नहीं किया गया था।
तुला सिंह तड़ियाल ने कहा कि जीओ कंपनी द्वारा बनाए गए गड्ढों को भरने के लिए उन्होंने स्वयं कई बार विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए गड्ढा मुक्त अभियान चलाया गया, लेकिन यह अभियान भी केवल रस्म अदायगी तक सीमित रह गया। आज उखड़े हुए कंकर ही दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास के नाम पर खुला खेल चल रहा है और सरकार का अपने अधिकारियों पर कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है। घटना को एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद सरकार द्वारा मृतकों के आश्रितों के लिए किसी भी प्रकार की राहत राशि घोषित नहीं की गई है और न ही घायलों के इलाज के लिए कोई ठोस व्यवस्था की गई। अधिकतर घायलों को उनके परिजन अपने निजी संसाधनों से इलाज के लिए ले जाने को मजबूर हुए हैं।
यूकेडी नेता ने मांग की है कि प्रत्येक मृतक के आश्रित को पाँच-पाँच लाख रुपये की राहत राशि दी जाए तथा घायलों को कम से कम 2.5 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जाए। साथ ही घायलों के इलाज पर होने वाला संपूर्ण खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाए।
रिपोर्टर- रिया सोलीवाल








