सेवानिवृत्त कर्मचारी को तीन वर्ष बाद भी नहीं मिला जीपीएफ भुगतान, विभागीय उदासीनता पर उठे सवाल।

अल्मोड़ा। उत्तराखंड विकेन्द्रीकृत जलागम विकास परियोजना, अल्मोड़ा प्रभाग में कार्यरत रहे हरीप्रसाद टम्टा ने वर्ष 1985 से निरंतर अपनी सेवाएं प्रदान कीं। वे नवंबर 2022 में मानचित्रकार के पद से अधिवर्षता पर सेवानिवृत्त हुए। हरीप्रसाद टम्टा ने अपनी संपूर्ण सेवा अवधि ईमानदारी, लगन और निष्ठा के साथ पूर्ण की।

सेवानिवृत्ति के समय उनके जीपीएफ खाते में लगभग ₹6 लाख की धनराशि जमा थी, लेकिन सेवानिवृत्ति के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी उक्त राशि का भुगतान अब तक नहीं किया गया है। जीपीएफ भुगतान के लिए हरीप्रसाद टम्टा द्वारा जलागम कार्यालय में कई बार लिखित एवं मौखिक रुप से निवेदन किया गया, किंतु विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

परेशान होकर उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से विभाग को कानूनी नोटिस प्रेषित किया। इस पर विभागीय अधिकारियों द्वारा उन्हें आश्वस्त किया गया कि यदि वे न्यायालय की कार्यवाही न करें तो शीघ्र ही भुगतान कर दिया जाएगा। इस आश्वासन पर विश्वास करते हुए हरीप्रसाद टम्टा ने न्यायालय में वाद दायर नहीं किया।

लंबे समय तक भुगतान न होने पर मजबूर होकर उन्होंने सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका। इससे यह स्पष्ट होता है कि न तो विभागीय अधिकारियों पर प्रार्थना पत्रों का कोई प्रभाव पड़ रहा है और न ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था का।

यह स्थिति सरकार एवं संबंधित विभागों की सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हितों के प्रति उदासीनता को दर्शाती है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

रिपोर्टर- रिया सोलीवाल

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