महंगाई आसमान पर, लेकिन संविदा प्राध्यापकों का वेतन वहीं का वहीं — 2019 से 2026 तक नहीं बढ़ी एक भी रुपये की तनख्वाह।

नैनीताल। देश में पिछले कुछ वर्षों में महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। 2019 से 2026 के बीच सोना, चांदी, डेयरी प्रोडक्ट, गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, राशन, बच्चों की फीस और मकान किराए जैसी लगभग सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। लेकिन दूसरी ओर शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले संविदा प्राध्यापकों का वेतन पिछले कई वर्षों से जस का तस बना हुआ है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019 में सोने की कीमत लगभग 35 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो 2026 में लगभग 1.6 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई है। इसी प्रकार चांदी की कीमत 2019 में करीब 38 हजार रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो अब बढ़कर लगभग 2.7 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।

घरेलू उपयोग की वस्तुओं में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। 2019 में घरेलू गैस सिलेंडर लगभग 700 रुपये का मिलता था, जो अब 900 रुपये से अधिक हो चुका है। पेट्रोल और डीजल, जो क्रमशः 70 और 60 रुपये प्रति लीटर थे, आज लगभग 94 रुपये प्रति लीटर के आस-पास पहुंच गए हैं। घर में रोज उपयोग होने वाले दूध की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर लगभग 65 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

छोटे शहरों में जहां एक कमरे का किराया पहले लगभग 1,000/- रुपये हुआ करता था, वहीं अब यह बढ़कर 6,000/- रुपये या उससे अधिक हो गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी महंगाई का असर साफ दिखाई देता है। निजी स्कूलों की फीस, जो 2019 में लगभग 500/- से 1,000/- रुपये प्रति माह थी, वह अब बढ़कर 3,000/- से 5,000/- रुपये प्रति माह तक पहुंच चुकी है। इसी प्रकार एक सामान्य परिवार का मासिक राशन खर्च 2,500/- से 3,000/- रुपये से बढ़कर 8,000/- से 10,000/- रुपये के बीच पहुंच गया है। मोबाइल रिचार्ज में भी लगभग 135 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई है।

इन सबके बीच सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि संविदा प्राध्यापकों का वेतन 2019 में भी लगभग 35 हजार रुपये था और 2026 में भी वही 35 हजार रुपये बना हुआ है। यानी पिछले सात वर्षों में महंगाई कई गुना बढ़ गई, लेकिन शिक्षकों की आय में कोई वृद्धि नहीं हुई।

इतना ही नहीं, राज्य के अनेक संविदा प्राध्यापक पिछले 8, 10 और 12 वर्षों से लगातार महाविद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं, फिर भी आज तक उनके विनियमितिकरण (Regularization) को लेकर कोई स्पष्ट नीति या नियम नहीं बनाए गए हैं। लंबे समय से कार्यरत इन शिक्षकों के सामने भविष्य की असुरक्षा का संकट भी बना हुआ है।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि जब जीवन यापन का खर्च लगातार बढ़ रहा है और प्राध्यापक वर्षों से उच्च शिक्षा संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, तब उनके वेतन और सेवा सुरक्षा पर ठोस निर्णय लिया जाना अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि देश के भविष्य का निर्माण करने वाले शिक्षकों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। ऐसे में महंगाई के अनुरुप वेतन वृद्धि और लंबे समय से कार्यरत संविदा प्राध्यापकों के विनियमितिकरण को लेकर शीघ्र ठोस नीति बनाए जाने की आवश्यकता है।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *