देघाट में चैत्राष्टमी मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, बदला मेले का स्वरुप।

स्याल्दे/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। देघाट में आयोजित प्रसिद्ध चैत्राष्टमी मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह से ही मंदिर में दर्शनार्थियों का तांता लगना शुरु हो गया, जो दिनभर चलता रहा। मंदिर समिति द्वारा प्रथम नवरात्र से मंदिर में भागवत कथा का आयोजन भी किया गया।

मेले में “जय माता” के उद्घोष के साथ प्रत्येक गाँव से माता के डोले के साथ मेलार्थी ढोल-नगाड़ों के साथ मेला परिसर में पहुंचे। मेले में स्थानीय व्यापारियों सहित बाहर से भी बड़ी संख्या में व्यापारी अपनी दुकानें लेकर पहुंचे, जहां लोगों ने जमकर खरीदारी की। मेला सम्पन्न होने पर मंदिर समिति ने शासन-प्रशासन व क्षेत्रीय जनता का आभार जताया।

नहीं दिखे लकड़ी के कृषि यंत्र:
एक समय था जब इस मेले में कृषि यंत्र जैसे—हल, दनेला, पाटा, नस्युड़ा व अन्य कुल्हाड़ी, कुदाल, दराती के हथ्थे आदि भी बिकने आते थे। दूर-दराज क्षेत्रों से लोग इन यंत्रों को खरीदने पहुंचते थे, लेकिन मशीनीकरण के दौर में ये परंपराएं अब विलुप्त होती जा रही हैं।

प्रशासन ने किए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम:
मेले में प्रशासन की ओर से थानाध्यक्ष अजेन्द्र प्रसाद व तहसीलदार स्याल्दे सुनील दत्त सिमल्टी द्वारा सुरक्षा व निगरानी के पूरे प्रबंध किए गए थे।

बिना पशु बलि के शांतिपूर्ण आयोजन:
चैत्राष्टमी मेला पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी बिना पशु बलि के शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हुआ। पशुओं के स्थान पर कई गाँव सुरमोली, बबलिया, गोलना, भरसोली, बसनलगाँव आदि से ग्रामीण जयकारों के साथ माता का डोला लेकर मेला स्थल पर पहुंचे।

आस्था पर पलायन का असर:
कभी इस मेले में कुमाऊँ व गढ़वाल क्षेत्र से 40 से 50 हजार से अधिक मेलार्थी पहुंचते थे, लेकिन बीते समय में लगातार पलायन के कारण मेले का स्वरुप बदला हुआ नजर आया। वर्तमान में 10 हजार मेलार्थियों की संख्या भी कम मानी जा रही है।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *