अम्बेडकर जयंती पर कृपाल सिंह शीला के कुमाउनी गीत रचना को मिली सराहना।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर कृपाल सिंह शीला (सहायक अध्यापक), राजकीय जूनियर हाईस्कूल मुनियाचौरा द्वारा एक कुमाउनी गीत रचना प्रस्तुत की गई। इस गीत के माध्यम से उन्होंने बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, शिक्षा के प्रति उनके योगदान और समाज में समानता के संदेश को सरल एवं भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया है। स्थानीय स्तर पर इस रचना की सराहना की जा रही है और इसे अम्बेडकर जयंती पर एक प्रेरणादायक प्रस्तुति के रुप में देखा जा रहा है।

कुमाउनी गीत:
महामनखी बाबासाहेब

आजक दिन पैद हया,
एक महामनखी ।
देश कैं नयी दिशा द्यैछ,
देशक संविधान ल्येखी ।।
देशक ——— ल्येखी ।।

ईजा क् नाम भीमबाई,
बौज्यू नाम रामजी सकपाल,
14 अप्रैल 1891 हुणि,
पैद हई भीमा लाल ।।
पैद हई———लाल ।।

गरीबी में पलि पोषी,
तुमर जीवन में रया भौत अभाव,
विद्वान लोगों बीच में,
तुमर रयौ भल प्रभाव ।।
तुमर रयौ——–प्रभाव।।

ईज बौज्यु चौदवीं संतान,
बचपन बै रया प्रतिभावान।
संघर्षों बै लड़ि तुमुलै,
सबुकैं दियौ भल ज्ञान ।।
सबुकैं ————- ज्ञान ।।

चौसठ विषयों में मास्टर,
बत्तीस डिग्री लेई तुमुल ।
तुमर देश लिजी योगदान कैं,
याद हमेशा हम करुल ।।
याद हमेशा ——— करुल।।

शिक्षित बणो, संगठित रहो,
अधिकारों लिजी संघर्ष करो।
समाज में समभाव बढ़ो,
जागो युवा कुछ तै करो ।।
जागो युवा ——— तै करो ।।

कुशल राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री,
विधिवेत्ता, शिक्षाविद, मानवविज्ञानी।
समाज सुधारक, दार्शनिक,
पत्रकार, लेखक ज्ञानी ।।
पत्रकार ———– ज्ञानी ।।

सबु कैं मिलौ समाज में,
समानताक अधिकार,
शिक्षा लै दूर हृवलौ,
अशिक्षा कौ अंधकार ।।
अशिक्षा ——— अंधकार ।।

जो घर में महिला पढ़ि ह्वोलि,
क्वे अनपढ़ नि रहौलौ ।
अंधविश्वास, भेदभाव, कुरीत,
समाज बै मिटि जालौ ।।
समाज बै ———– जालौ।।

तुम विद्वान, तुम महान,
देशकि तुम अमर शान।
तुमरि जयंती पारि,
हम हाथ जोड़ि, करुं प्रणाम ।।
हम हाथ ————- प्रणाम ।।
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रचनाकार: कृपाल सिंह शीला (स.अ.)
रा.जू.हा. मुनियाचौरा, क्षेत्र – भिकियासैंण (अल्मोड़ा)

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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