भिकियासैंण क्षेत्र में गौवंशों की मौत का मामला गरमाया, ट्रक चालक समेत संबंधित लोगों पर एफआईआर दर्ज करने की उठी मांग।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। भिकियासैंण क्षेत्र में कथित रुप से गौवंशों को लावारिस हालत में छोड़ने और उनकी मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मामले को लेकर नंदन सिंह स्थानीय निवासी बासोट ने थाना भतरौंजखान में लिखित शिकायत देकर ट्रक चालक, उससे जुड़े लोगों तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत के अनुसार 08 जुलाई 2026 की रात लगभग 9:45 बजे भारी बारिश के दौरान भिकियासैंण–बासोट मोटरमार्ग के थापला मार्ग पर ट्रक संख्या UK19CA1810 में गौवंशों को भरा जा रहा था। पूछताछ करने पर मौजूद लोगों ने बताया कि गौवंशों को गौशाला ले जाया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने उसी समय इसकी सूचना मोहान चौकी में भी दी थी।

शिकायत में कहा गया है कि अगले दिन मोहान चौकी से फोन कर बताया गया कि ट्रक चालक सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ गौवंशों को हरड़ा स्थित गौशाला में छोड़ आया है। लेकिन 09 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखने के बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि वही गौवंश मछोड़ क्षेत्र के पास लावारिस हालत में पड़े हुए हैं। आरोप है कि उनमें से 02 से 03 गौवंशों की मौत हो चुकी थी, जबकि कुछ गौवंश रस्सियों से बंधे हुए मिले, जिससे उनके साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने की आशंका जताई गई है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि गौवंशों को जानबूझकर मरने के लिए छोड़ दिया गया तथा इस पूरे मामले में ट्रक चालक और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। साथ ही भिकियासैंण प्रशासन की कथित लापरवाही और मोहान चौकी द्वारा गलत जानकारी देकर गुमराह किए जाने की भी जाँच कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि ट्रक के आने और वापस जाने से संबंधित सीसीटीवी फुटेज उनके पास सुरक्षित हैं, जिन्हें जाँच के दौरान साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

उन्होंने पुलिस से प्रकरण में तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जाँच करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगे।

फिलहाल पुलिस की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और न ही एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि हुई है।

गौशालाओं की व्यवस्था पर भी उठे सवाल:
मामले के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब सरकार प्रति गौवंश प्रतिदिन 80 रुपये गौशालाओं को उपलब्ध करा रही है, तो फिर गौवंश गौशालाओं तक क्यों नहीं पहुंच रहे हैं और लावारिस क्यों छोड़े जा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ गौशाला संचालक गौवंश पालकों से भी धनराशि लेकर गौवंशों को गौशालाओं में रखते हैं और बाद में उन्हें लावारिस छोड़ देते हैं। इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कर यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए तथा गौवंशों के संरक्षण के लिए प्रभावी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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