हरेला पर्व पर राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत में हुआ वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश।

शीतलाखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के लोक पर्व हरेला के अवसर पर राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत में विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण, छात्र-छात्राओं एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिलकर महाविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया।

वृक्षारोपण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना, प्रदूषण को नियंत्रित करना तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। कार्यक्रम के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए भावी पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम प्रभारी डॉ. प्रकाश चंद्र जांगी ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत साहित्य में भी वृक्षारोपण के महत्व का उल्लेख अनेक स्थानों पर किया गया है। उन्होंने श्लोक उद्धृत करते हुए कहा —

“दशकूपसमा वापी दशवापीसमो ह्रदः।
दशह्रदसमो पुत्रो दशपुत्रसमो द्रुमः।।”

उन्होंने इसका अर्थ बताते हुए कहा कि दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक तालाब, दस तालाबों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के समान एक वृक्ष होता है। अर्थात एक वृक्ष का रोपण एवं उसका संरक्षण करना अत्यंत पुण्यकारी कार्य है।

इस अवसर पर महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुक करते हुए “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण करने तथा लगाए गए पौधों की सुरक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ललन प्रसाद वर्मा, डॉ. सीमा प्रिया, डॉ. प्रकाश चंद्र जांगी, डॉ. छत्र सिंह कठायत, डॉ. राजेंद्र चंद्र पांडे, लक्ष्मी मनराल, अनुज कुमार, हेमंत मनराल, विनोद कुमार, कमल बनकोटी, लाल सिंह नेगी सहित महाविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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