बोधिसत्व व्याख्यान माला के अंतर्गत ‘सूर्य के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्ष’ विषय पर व्याख्यान आयोजित।
शीतलाखेत (अल्मोड़ा)। राजकीय महाविद्यालय शीतलाखेत में “बोधिसत्व व्याख्यान माला” के अंतर्गत “सूर्य के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक पक्ष (Scientific and Spiritual Aspects of the Sun)” विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ललन प्रसाद वर्मा ने विषय पर अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी व्याख्यान प्रस्तुत किया।
अपने व्याख्यान में प्राचार्य प्रो. वर्मा ने कहा कि सूर्य के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। उन्होंने सूर्य के वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों का समन्वित एवं रोचक विवेचन करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में सूर्य को ऊर्जा, प्रकाश, जीवन तथा चेतना का मूल स्रोत माना गया है। उन्होंने सूर्योपासना की परंपरा, मकर संक्रांति के वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक महत्व तथा मानव जीवन पर सूर्य के सकारात्मक प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उन्होंने सूर्य की संरचना, उसके विभिन्न स्तरों (परतों), सूर्य के तापमान, सूर्य के विभिन्न रंगों, ऋतु परिवर्तन में उसकी भूमिका, सौर ऊर्जा के उपयोग, सोलर पैनलों की उपयोगिता तथा सोलर फ्लेयर जैसी खगोलीय घटनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सौर ऊर्जा स्वच्छ एवं सतत विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है तथा पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने विषय से संबंधित अनेक जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका प्राचार्य ने सरल एवं वैज्ञानिक ढंग से समाधान किया। उनका व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रहा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रकाश चंद्र जांगी (सहायक आचार्य, संस्कृत विभाग) द्वारा किया गया। कार्यक्रम का आयोजन “बोधिसत्व व्याख्यान माला” के नोडल अधिकारी डॉ. छत्र सिंह कठायत (सहायक आचार्य, राजनीति विज्ञान विभाग) के निर्देशन एवं संयोजन में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण, शिक्षणेत्तर कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल










