देवताओं के अहंकार को नष्ट करने के लिए भगवान शिव ने लिया यक्षेश्वर अवतार।
स्याल्दे/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। जय महाकाल सेवा समिति भरसोली द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के दशम दिवस मुख्य यजमान दीवान सिंह बंगारी एवं उनकी धर्मपत्नी गोपुली देवी बंगारी, निवासी फतेहपुर तथा महेश चन्द्र सिंह घुघत्याल एवं उनकी धर्मपत्नी मीना देवी घुघत्याल, निवासी दलमोड़़ी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
तत्पश्चात कथा व्यास नन्दा वल्लभ पंत ने शिव महापुराण कथा के माध्यम से भगवान शिव के यक्षेश्वर अवतार का सुंदर वर्णन किया। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन के पश्चात जब देवताओं को अमृत प्राप्त हुआ, तो वे अमर हो गए। अपनी शक्ति के मद में चूर होकर देवता अहंकार करने लगे।
देवताओं के इस घमंड को दूर करने के लिए भगवान शिव एक यक्ष के रुप में उनके सामने प्रकट हुए। यक्ष ने देवताओं के सामने एक तिनका रखा और चुनौती दी कि यदि वे स्वयं को सबसे शक्तिशाली मानते हैं, तो इस तिनके को जलाकर या उठाकर दिखाएं।
अग्निदेव उस तिनके को जला नहीं पाए और वायुदेव उसे उड़ा नहीं सके। अंत में इंद्र भी असफल रहे। तब देवी पार्वती प्रकट हुईं और देवताओं को समझाया कि वह कोई साधारण यक्ष नहीं, बल्कि स्वयं परमब्रह्म भगवान शिव हैं। इससे देवताओं को अपनी भूल का अहसास हुआ और उनका अहंकार नष्ट हो गया।
आयोजन को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष प्रताप सिंह डगवाल, महेंद्र सिंह बंगारी, त्रिलोक सिंह पटवाल, आनंद सिंह रावत, रामदत्त ढौंडियाल, बालम सिंह बंगारी, कैलाश ढौंडियाल, हीरा सिंह बंगारी, कुंदन सिंह महेता, लक्की प्रताप सिंह बंगारी, खुशहाल सिंह बंगारी, इंद्र सिंह महेरा, बचें सिंह बंगारी, मनोज चंद्र जोशी आदि सहयोग में जुटे रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल














