मुख्यमंत्री उत्कृष्ट शोध पत्र प्रकाशन प्रोत्साहन योजना में डॉ. सुरेंद्र पड़ियार एवं प्रो. नवीन भगत का चयन।
खटीमा (उधम सिंह नगर)। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध, नवाचार एवं अकादमिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री उत्कृष्ट शोध पत्र प्रकाशन प्रोत्साहन योजना 2026–27 के अंतर्गत राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय खटीमा के गणित विभाग में कार्यरत डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह पड़ियार तथा उनके शोध निदेशक रहे प्रो. नवीन भगत का चयन हुआ है। प्रो. नवीन भगत वर्तमान में नानकमत्ता डिग्री कॉलेज के प्राचार्य हैं। दोनों शिक्षाविदों का चयन क्षेत्र में शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि है।
उत्तराखंड शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग की इस योजना का उद्देश्य निर्धारित मानकों के अनुरुप प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध कार्यों को प्रोत्साहित करना तथा प्रदेश में शोध संस्कृति को सुदृढ़ करना है। गणित विषय में उत्तराखंड से आठ प्राध्यापकों के चयन की जानकारी सामने आने से राज्य में गणितीय अनुसंधान एवं अकादमिक गतिविधियों को लेकर उत्साह का वातावरण है।
डॉ. सुरेंद्र पड़ियार उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अध्यापन के साथ-साथ शोध एवं अकादमिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहे हैं। उनके चयन को उनके शोध प्रयासों तथा गुणवत्तापूर्ण शोध प्रकाशन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रुप में देखा जा रहा है।
वहीं, उनके शोध निदेशक रहे प्रो. नवीन भगत का चयन गुरु-शिष्य की अकादमिक परंपरा और शोध मार्गदर्शन के महत्व को भी रेखांकित करता है।
इस उपलब्धि पर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय खटीमा में प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. सुरेंद्र पड़ियार को बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। प्रो. नवीन भगत को भी उनकी उपलब्धि पर बधाई दी गई।
महाविद्यालय परिवार ने आशा व्यक्त की कि यह सफलता अन्य प्राध्यापकों एवं युवा शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शोध, नवाचार तथा प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशन के लिए प्रेरित करेगी।
प्रो. नवीन भगत ने इस उपलब्धि के लिए उत्तराखंड शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने शोध एवं अकादमिक कार्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रोत्साहन योजनाएं शिक्षकों को अनुसंधान के नए आयाम तलाशने और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती हैं।
यह उपलब्धि प्रदेश में शोधपरक शिक्षा, अकादमिक सहयोग तथा नवाचार की संभावनाओं को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इससे न केवल शिक्षकों के शोध कार्यों को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान के प्रति सकारात्मक वातावरण विकसित करने में भी सहायता मिलती है।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल






