विश्व जल दिवस पर नौला फाउंडेशन द्वारा स्याल्दे में किए गए सांस्कृतिक कार्यक्रम।
भिकियासैंण/स्याल्दे। विश्व जल दिवस के अवसर पर नौला फाउंडेशन के तत्वाधान में स्याल्दे विकासखंड के ग्राम कफलटाना में जल चर्चा संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी भारत में गंगा नदी बेसिन में सतही जल भंडारण घरेलू, कृषि और औद्योगिक मांग के लिए मीठे पानी की आपूर्ति का एक मूल्यवान स्रोत है, लेकिन नदी के किनारे शहरी करण और औद्योगिकरण की प्रक्रिया ने इस मीठे पानी के स्रोत के लुप्त होने का खतरा बढ़ा दिया है।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि गंगा बेसिन में जल संसाधन प्रबंधन की सबसे कठिन चुनौती पानी की मांग और मौसमी उपलब्धता के बीच असंतुलन है। गंगा नदी में वार्षिक प्रवाह का 80% से अधिक 4 महीने के मानसून के दौरान होता है, जिसके परिणाम स्वरुप व्यापक बाढ़ आती है। शेष वर्ष के दौरान, पानी की कमी के कारण सिंचाई, नेविगेशन और पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होते हैं। शुष्क मौसम के दौरान उपयोग के लिए मानसूनी प्रवाह का भंडारण इन समस्याओं को कम करने का एक तरीका है।
इसी क्रम में विश्व जल दिवस पर सामुदायिक आधारित संस्था नौला फाउंडेशन के तत्वाधान में विकासखंड स्याल्दे के ग्राम पंचायत कफलटाना में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें ग्राम प्रधान राधिका शर्मा के नेतृत्व में महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया, जिसमें उन्होंने स्थानीय जल श्रोतों का स्वच्छता अभियान, पूजा भजन के साथ-साथ जल श्रोतों पर पारंपरिक परिधान पहन कर झोड़े भी गाए गए, साथ ही प्रसाद वितरण भी किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कमला देवी, रेखा देवी, राधा देवी, लक्ष्मी देवी, कौशल्या देवी, सोनू, चना देवी आदि ग्रामीण उपस्थित रहे।
रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण





