राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय बासोट में ‘औंड़ दिवस’ पर वनाग्नि रोकथाम को लेकर जागरुकता।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय बासोट में वनाग्नि की घटनाओं को कम करने एवं उनके कारणों तथा नियंत्रण के उपायों पर जनजागरुकता फैलाने के उद्देश्य से ‘औंड़ दिवस’ का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मंचस्थ अतिथि बीना देवी एवं दीपा देवी ने बच्चों को वनाग्नि की घटनाओं को कम करने, जनजागरुकता के माध्यम से वनों के संरक्षण की आवश्यकता तथा ‘औंड़ दिवस’ की सार्थकता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वनाग्नि से होने वाले नुकसान को भी प्रमुखता से रखा।
कार्यक्रम में सोम्या, गीता कुमारी, आरुष, मोहित, गायत्री, दक्ष गोस्वामी, हर्षित, दीपिका एवं आर्यन ने वनाग्नि के कारणों एवं उससे होने वाले नुकसान पर अपने विचार व्यक्त किए। बच्चों ने बताया कि राहगीरों द्वारा जलती माचिस की तीली, जली हुई बीड़ी को घास में फेंक देना तथा बारातों में बम-पटाखे फोड़ना आग लगने के मुख्य कारण हैं।
शिक्षिका ज्योति गोस्वामी ने बच्चों को वनाग्नि से होने वाले नुकसान के प्रति सचेत किया तथा इसे रोकने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर किए जा सकने वाले प्रयासों की जानकारी दी। शिक्षक ताजदार अंसारी, कृपाल सिंह शीला एवं बलवीर सिंह ने भी ‘औंड़ दिवस’ के माध्यम से समाज में जनजागरुकता फैलाने हेतु सरकार एवं शिक्षा विभाग की पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने वनों की सभी जीवों के लिए उपयोगिता पर सरल शब्दों में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक डी.एस. गिरी ने बच्चों को जनजागरुकता फैलाने में “पोस्टमैन” की संज्ञा देते हुए कहा कि जिस प्रकार पोस्टमैन संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, उसी प्रकार बच्चे भी समाज में जागरुकता फैलाकर वनों को आग से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सभी जीवों के लिए वनों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हरे-भरे वृक्षों से ही प्राणवायु (ऑक्सीजन) सहित जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त होते हैं।
‘औंड़ दिवस’ पर सभी बच्चों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने तथा पर्यावरण एवं जैव समुदाय के हित में कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन विज्ञान शिक्षक कृपाल सिंह शीला द्वारा किया गया।



