मासी में पौराणिक काल से मनाया जाने वाला भूमिया दिवस।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। मासी में पौराणिक काल से मनाया जाने वाला भूमिया दिवस सोमनाथ मेले के सल्टिया मेले के पहले दिन मनाया जाता है। लोककथा के अनुसार बताया जाता है कि मासी रामगंगा नदी के तल पर स्थित भूमियां मंदिर जो कुमाऊं व गढ़वाल में प्रख्यात है, पौराणिक है कि समय से बद्रीनाथ जाने वाले यात्रियों का एक पड़ाव मासी में होता था, जिस जगह पड़ाव लगता था, वही पर मांसी के महाराज भूमियां देव अपनी कृपा करते बताते है, कि चौकोट व गेवाड़ के तांत्रिको के बीच शक्ति प्रदर्शन परीक्षण हुआ, उसी के परिणाम स्वरुप मासी में भूमियाँ देवता की अराधना का शुभारम्म हुआ।
गेवाड़ के कई ग्रामों कि सरहद में फलदायक देव है, बहू – बेटी भी बधाई के रुप में पूजते है। बाबा के दरबार में यहाँ के प्रवासी जो कहीं भी रहता हो, भडारे में जरुर पहुंचता है। अपने – अपने तरफ से भंडारा देते है। यहां कोई भी भेदभाव नहीं, इस लिए उनके गुरु चौकोट से मासी लाये गये जो अब यही बस गये बताते है कि एक बभूती की चुटकी से ही लाभ मिलता है। भूमिया बाबा को न्याय कारी माना जाता है। यहाँ हर दिन भक्तों की भीड़ लगी रहती है, भक्त हर मंगलवार व शनिवार को पूजा अर्चना करते है। परिसर के साथ में हनुमान जी व शिव दीपा भाई विराजमान है। मंदिर के पूजारी यहाँ के निवासी है व कमेटी के अध्यक्ष रामस्वरुप मासीवाल कुन्दन सिंह रावत, राजे लिह बिष्ट, विनोद पाठक, रमेश चन्द्र मासीवाल, रघु मासीवाल, रामदत्त, मोहन सिंह, शंकर सिंह, खीमा काण्डपाल, सुन्दर सिंह, नन्द किशोर आदि भारी संख्या में लोग मौजूद थे।



