खराब सिस्टम के चलते खेरकुड़ा तोक में एक बुजुर्ग की गई जान।

चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चम्पावत को मॉडल जिला बनाने की बात कहते हैं, लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी इस बात को मजाक में लेते हैं। जिले में ऐसे अधिकारी बैठे हुए हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री की बातों से कोई लेना-देना ही नहीं है। अब जिले में ऐसा लगने लगा है कि अधिकारी लोगों की मूल समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाते ही नहीं हैं। अगर ऐसा होता तो आज सड़क के अभाव में एक बुजुर्ग की जान नहीं जाती, क्योंकि एक साल पहले भी यहां सड़क की मांग जोरों पर थी और एक वीडियो भी वायरल हुआ था।

समस्या करीब एक साल पहले की है, जब मॉडल जिले के पाटी विकासखंड के अंतर्गत रमक के खेरकुड़ा तोक में एक व्यक्ति को हार्ट अटैक आया था। मरीज को डोली से सड़क तक पहुंचाया गया था और यहां सड़क की पाटी विकासखंड के सीमांत गाँव खेरकुड़ा में रोड़ के अभाव के चलते एक की जान चले गई। एक बुजुर्ग को सड़क न होने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी है। यहां वक्त पर अस्पताल न पहुंचने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई। यहां किलोमीटरों डोली से लाने के बाद रमक से निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाते वक्त बुजुर्ग की मौत हो गई।

रमक क्षेत्र के खेरकुड़ा तोक में मंगलवार को रमक ग्राम पंचायत प्रशासक मंगल जोशी के पिता त्रिलोक चंद्र जोशी (67) की अचानक तबीयत बिगड़ी। उन्हें खेरकुड़ा तोक से किलोमीटरों दूर रमक तक डोली से लाया गया। इस उबड़-खाबड़ रास्ते को लीलंबर अटवाल, भुवन चंद्र, प्रकाश चंद्र, उमेश चंद्र, नरेश चंद्र, परमानंद, गिरीश जोशी, मंगल जोशी, पानदेव जोशी, दयानंद जोशी, नवीन जोशी आदि लोगों की मदद से 3 घंटे से अधिक समय में पार किया गया तब जाकर बमुश्किल रमक तक पहुंच पाएं। समय बीतने के साथ बीमार बुजुर्ग की हालत बिगड़ने लगी, जिसके बाद रमक से निजी वाहन से अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में मरीज ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि सालों से सड़क की मांग कर रहे हैं लेकिन चम्पावत जिले के बहरे सिस्टम को सुनाई नहीं देता। उनका कहना है अगर गाँव तक सड़क होती तो समय रहते मरीज को अस्पताल पहुंचा पाते और हो सकता था कि समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच जाती। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सड़क की मांग को लेकर आला अफसरों से गुहार लगाकर थक चुके हैं। ग्रामीणों द्वारा बरसों से इस मांग को उठाया गया है किंतु सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। प्रशासन की इन गलतियों का भुगतान आम जनमानस को भरना पड़ता है। ग्रामीणों में अत्यधिक आक्रोश है।

रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण

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