पर्यावरण संरक्षण के लिए कृपाल सिंह शीला के नवाचारी प्रयास।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। अपने आस-पास, परिवेश और पर्यावरण को साफ-स्वच्छ रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। इसी भावना के साथ कृपाल सिंह शीला विगत कई वर्षों से अपने स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे-छोटे परंतु महत्वपूर्ण प्रयास करते आ रहे हैं।
उन्होंने बच्चों द्वारा रास्तों में फेंके जाने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों के रैपर्स को एकत्रित कर उनका पुन: उपयोग (Re-use) करने का अनोखा तरीका विकसित किया है। इन रैपर्स से वे बच्चों के खेलने के लिए प्लास्टिक की बॉल बनाते हैं, पौध उगाने के लिए पॉलीबैग तैयार करते हैं तथा घर में चूल्हा व अंगीठी जलाने के लिए भी इनका उपयोग करते हैं।
चिप्स, कुरकुरे, लेज, टकाटक, हंक, मंच, विंगो टेढ़े-मेढ़े, मनचूरियन, जू, एबीसीडी, क्रक्स, कचरी, लूटपाट, काला भूत, चाचा-चाची, पोला पापड़ आदि के रंगीन रैपर्स सड़कों पर बिखरे रहने से जहाँ पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है, वहीं पैदल चलने वालों के फिसलने की घटनाएँ भी सामने आती हैं। ये रैपर्स अजैविक कचरे के रुप में एक बड़ी समस्या उत्पन्न करते हैं।
इन समस्याओं से निपटने के लिए हमें इनके कम उपयोग (Reduce) और पुन: उपयोग (Re-use) की आदत अपनानी चाहिए। आइए, हम सभी भी अपने छोटे-छोटे प्रयासों से पर्यावरण को साफ-स्वच्छ रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। जब हमारा पर्यावरण स्वच्छ होगा, तो हम भी स्वस्थ जीवन जी सकेंगे।



