26 नवम्बर 2024 को शिक्षा मंत्री के दिए आदेश का सचिवालय द्वारा नहीं हुआ पालन, 25 विधायक-सांसद का सौंपा समर्थन पत्र: दिगम्बर फुलोरिया।

देहरादून। बेसिक संवर्ग से एलटी में समायोजित पदोन्नत समान वेतनमान पर कार्यरत शिक्षकों को चयन प्रोन्नत वेतनमान देने की मांग को लेकर शिक्षकों ने 23 सितम्बर को शिक्षा मंत्री डॉ. धनसिंह रावत से उनके यमुना कॉलोनी स्थित निवास पर मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने सचिवालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “सिर्फ एक शब्द संशोधित कराने में सचिवालय को 10 वर्ष क्यों लग रहे हैं?”

शिक्षकों ने याद दिलाया कि 2017 में पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सेवा नियमावली संशोधित करने का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन अब तक अमल नहीं हुआ। यहां तक कि शिक्षा मंत्री के आदेशों का भी पालन नहीं हो रहा है।

2014 की सेवा नियमावली पर आपत्ति:
शिक्षकों ने कहा कि 2014 की सेवा नियमावली में “पदोन्नत” शब्द को हटाकर “समायोजन” शब्द जोड़ा जाना चाहिए। लेकिन इस संशोधन को लेकर सचिवालय में वर्षों से प्रक्रिया लंबित है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सचिवालय के विभागीय सचिव और अधीनस्थ कार्मिक 10 वर्षों से पत्रावली कैबिनेट में नहीं ला पाए हैं।

2014 और 2024 की बैठकें:
● 26 नवम्बर 2024 को शिक्षा निदेशालय में आयोजित बैठक में शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में शिक्षा सचिव, वित्त सचिव, कार्मिक सचिव, न्याय सचिव, शिक्षा महानिदेशक, शिक्षा निदेशक सहित सभी विभागों ने सहमति दी थी कि इस संशोधन को कैबिनेट में प्रस्तावित किया जाएगा।
● बैठक में राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच के प्रदेश अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया और महासचिव जेपी सिलौड़ी को भी आमंत्रित किया गया था।

शिक्षकों का तर्क:
● बेसिक संवर्ग के शिक्षक समान शैक्षिक योग्यता रखते हुए भी 4600 ग्रेड पे प्राप्त कर रहे हैं, जबकि जूनियर हाईस्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों को 5400/4800 ग्रेड पे मिल रहा है।
● शिक्षकों का कहना है कि यह स्थिति वित्त विहीन मांग है और न्यायसंगत नहीं है।
● किसी प्रकार का न्यायालयी विवाद या वरिष्ठता विवाद भी नहीं है, बावजूद इसके मामला वर्षों से लंबित है।

शिक्षकों में आक्रोश:
संघर्ष मंच के अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया ने विज्ञप्ति जारी कर कहा कि –
● उतराखण्ड के 7000 बेसिक संवर्ग के शिक्षक आक्रोशित हैं। यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो शिक्षकों को कोर्ट का सहारा लेना पड़ेगा।
● उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मांग की कि अगली बैठक में निर्णायक फैसला लिया जाए और पत्रावली कैबिनेट में पास कर शासनादेश जारी किया जाए।

रिपोर्टर- रिया सोलीवाल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *