अल्मोड़ा में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 138वीं जयंती, हर वर्ग ने उन्हें किया याद।

अल्मोड़ा। महान समाज सुधारक व समतामूलक समाज के अग्रदूत रहे राय बहादुर मुंशी हरिप्रसाद टम्टा की 138वीं जयंती मंगलवार को उत्साह पूर्वक मनाई गई। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, विधायक मनोज तिवारी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान समेत कई अन्य लोगों ने चौघान पाटा में लेफ्टिनेंट सतीश चंद्र जोशी पार्क में स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

मुंशी हरिप्रसाद टम्टा जयंती समारोह समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक सामाजिक संगठनों के लोगों ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तृत प्रकाश डाला तथा उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। जयंती समारोह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री सांसद अजय टम्टा ने कहा कि मुंशी हरिप्रसाद टम्टा ने समता मूलक समाज की अलख पूरे उत्तराखंड में जगाई। वह सर्वसमाज के नेता थे। शिल्पकार समाज के साथ ही उन्होंने समाज के सभी वर्गों के लोगों के लिए ऐतिहासिक कार्य किए।

समिति के अध्यक्ष महेश चंद्र आर्या ने कहा मुंशी हरिप्रसाद टम्टा द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में खासकर महिला शिक्षा के क्षेत्र में दिया गया योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने अल्मोड़ा व उत्तराखंड को देशभर में एक पहचान दिलाई, जो जग जाहिर है। इस मौके पर समिति के सदस्यों द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा को ज्ञापन सौंपने के साथ डीएम को भी ज्ञापन प्रेषित किया, जिसमें मुंशी हरिप्रसाद टम्टा के नाम पर धर्मशाला के पुर्ननिर्माण करने पर प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और नगर निगम का आभार जताया और धर्मशाला का नाम पूर्व की भांति हरि प्रसाद टम्टा धर्मशाला अल्मोड़ा रखने की मांग की गई।

इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष महेश नयाल, दर्जा राज्य मंत्री गंगा बिष्ट, पूर्व विधान सभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान, दयाशंकर टम्टा, महेश प्रसाद टम्टा, महेश चंद्र आर्या, पूरन रौतेला, दीपेश टम्टा, डाॅ. दिवाकर टम्टा, सावन टम्टा, एडवोकेट नारायण राम, हरीश लाल, प्रकाश चंद्र आर्या, सुरेन्द्र कुमार, ए.के. सिकंदर पवार, बिट्टू कर्नाटक, विनीत बिष्ट, रवि रौतेला, ललित लटवाल, त्रिलोचन जोशी, धर्मेंद्र बिष्ट, नवीन बिष्ट, जगदीश नगरकोटी समेत कई लोग भारी संख्या में मौजूद थे।

वंचितों के योद्धा: रायबहादुर मुंशी हरिप्रसाद टम्टा।

अल्मोड़ा। 26 अगस्त को हम उस महान समाज सुधारक और दूरदर्शी व्यक्तित्व को याद करते हैं, जिनका जीवन संघर्ष और सेवा का पर्याय रहा है। रायबहादुर मुंशी हरिप्रसाद टम्टा.1887 में अल्मोड़ा में जन्मे थे। उन्होंने अपने जीवन को समाज के वंचित और शोषित वर्गों की आवाज बनाने में समर्पित किया। वे भली-भांति जानते थे कि असली स्वतंत्रता तभी मिलेगी जब समाज से जातिगत अन्याय और भेदभाव की जंजीरें टूटेंगी।

सन् 1911 में जॉर्ज पंचम के राजतिलक के दौरान उन्हें और उनके मामा को जातिगत आधार पर अपमानित किया गया। यह घटना उनके जीवन का निर्णायक मोड़ बनी। इस अपमान को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और शिल्पकार समाज के लिए संघर्ष की राह पर उतर पड़े। 1905 में ‘टम्टा सुधार सभा’ और बाद में ‘कुमाऊं शिल्पकार सभा’ की स्थापना कर उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान और आत्मनिर्भरता की अलख जगाई। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था, समाज को अपमानजनक संबोधन से मुक्ति दिलाना और ‘शिल्पकार’ शब्द को स्थापित करना। सन् 1926 में यह शब्द ब्रिटिश सरकार द्वारा औपचारिक रुप से मान्यता प्राप्त कर सका, जो उनकी अथक मेहनत का परिणाम था।

मुंशी हरिप्रसाद टम्टा केवल समाज सुधार तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने सन् 1920 में ‘हिल मोटर्स ट्रांसपोर्ट कंपनी’ की स्थापना कर उत्तराखंड में परिवहन की नई शुरुआत की और युवाओं को रोजगार के अवसर दिए। 1934 में शुरु किया गया उनका साप्ताहिक पत्र ‘समता’ वंचित समाज की बुलंद आवाज बना। उनकी भतीजी लक्ष्मी देवी टम्टा, जो उत्तराखंड की पहली वंचित स्नातक और ‘समता’ की पहली महिला संपादक बनी, इसी संघर्ष यात्रा का हिस्सा थी।

मुंशी हरिप्रसाद टम्टा का संघर्ष केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी था। सन् 1931 में उन्होंने पूना पैक्ट के समर्थन में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर को तार भेजकर अनुसूचित समाज के अधिकारों की लड़ाई में अपनी भागीदारी दर्ज कराई। 23 फरवरी 1960 को उनका देहावसान हो गया, लेकिन उनकी विचारधारा आज भी जीवित है। उन्होंने दिखाया कि असली बदलाव केवल विरोध से नहीं, बल्कि शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की बुनियाद पर खड़े समाज से संभव है। सभी को उनके जन्म दिवस को हर गाँव मे धूमधाम से मनाया चाहिए।

रिपोर्टर- रिया सोलीवाल

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