विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने आबकारी विभाग एवं जिला प्रशासन नैनीताल की कार्यप्रणाली से सरकार एवं मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का लगाया आरोप।
रामनगर। मुख्यमंत्री द्वारा नवसृजित शराब की दुकान बंद करने की सार्वजनिक घोषणा के बावजूद आबकारी विभाग, जिला प्रशासन द्वारा दुकानों को निरस्त करने का आदेश जारी न किए जाने से आक्रोशित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने उप जिलाधिकारी प्रमोद कुमार के माध्यम से मुख्यमंत्री, सचिव माननीय मुख्यमंत्री/ आयुक्त कुमाऊं मंडल नैनीताल, जिलाधिकारी नैनीताल को ज्ञापन भेजा गया।
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, इंकलाबी मजदूर केंद्र, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, महिला एकता मंच, वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति, समाजवादी लोकमंच, किसान संघर्ष समिति, राज्य निर्माण आंदोलनकारी मंच से जुड़े विभिन्न संगठनों के लोगों द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में बताया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 10 अप्रैल को सार्वजनिक रुप से अखबारों के माध्यम से घोषणा की गई थी कि नवसृजित शराब की दुकानों को नहीं खोला जाएगा लेकिन मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद आबकारी विभाग और जिला प्रशासन नैनीताल द्वारा अभी तक शराब की इन नई दुकानों को निरस्त करने के आदेश जारी नहीं किए गए है जिसके कारण अब माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा तथा उनकी छवि पर ही सवाल उठ रहे है, कि क्या सरकार का रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ में है जो ब्यूरोक्रेसी को नियंत्रित कर रहा है ?
मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में मांग की गई है कि पाटकोट, हाथीडंगर तहसील रामनगर सहित पूरे प्रदेश की नवसृजित शराब की दुकानों को अविलम्ब निरस्त करने का आदेश जारी करें। माननीय मुख्यमंत्री की 10 अप्रैल की घोषणा पर आबकारी विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा संज्ञान न लिए जाने के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करें। रामनगर तहसील अंतर्गत नवसृजित हाथीडंगर की शराब की दुकान को आबकारी विभाग एवं जिला प्रशासन की शराब ठेकेदार से मिलीभगत से गोपाल नगर मालधन में खोल दिया गया है। गोपाल नगर मालधन में नियम विरुद्ध छल कपट से खोली गई दुकान को अभिलंब निरस्त किया जाएं एवं शराब ठेकेदार से मिले हुए अधिकारियों पर सख्त कार्रवाही करने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में प्रभात ध्यानी, रोहित रुहेला, तुलसी छिम्बाल, गिरीश चंद्र आर्य, ललित उप्रेती, सरस्वती जोशी, कौशल्या, पी. सी. जोशी, इंद्र सिंह मनराल, पान सिंह नेगी, योगेश सती, एडवोकेट विक्रम मवाड़ी, एडवोकेट गिरीश चंद्र डोबरियाल, आसिफ आदि थे।



