स्वास्थ्य और योग ग्रामीण जीवन में प्रासंगिकता पर आयोजित हुआ सेमिनार।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विकासखंड स्याल्दे के ग्राम गणेतिया में पार्वती-मोती सदन ऐरारी रजवार में “स्वास्थ्य और योग ग्रामीण जीवन में प्रासंगिकता” पर प्रोफेसर महेश्वर दत्त कांडपाल मेमोरियल सेमिनार आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता सदानंद पांडेय ने की।
सेमीनार के पहले चरण में योगाचार्य डॉ. सत्य नारायण यादव, निदेशक, अर्चना योगायतन, दिल्ली और उपाध्यक्ष एम. आर. फाउंडेशन ने प्रातः काल साधकों को योग आसनों का अभ्यास कराया।
सेमिनार के दूसरे चरण में गणेतिया में जन्मे और दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत प्रोफेसर (स्वर्गीय) महेश्वर दत्त कांडपाल की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धा सुमन भेंट किये तथा शिक्षा, पर्यावरण, ग्रामीण विकास में उनके योगदानों को स्मरण किया। सदानंद पांडे, ने प्रो. महेश्वर दत्त कांडपाल के व्यक्तिगत एवं सामाजिक गुणों पर प्रकाश देते हुए बताया कि वह “अपने लिए कठोर और दूसरों के लिए उदार व्यक्तित्व के असाधारण व्यक्ति थे, अन्यथा इतनी सारी उपलब्धियाँ किसी आम व्यक्ति द्वारा यू ही पा लेना असंभव है”।
विख्यात योगाचार्य गिरीश झा द्वारा, अमेरिका से ऑनलाइन माध्यम द्वारा पतंजलि के योग सूत्र की पंक्ति, “योगस चित्त वृत्ति निरोध” का विवरण कर बताया गया कि किस प्रकार “मन ही रोग और मन ही निरोग का कारण है।”
जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय, दिल्ली के प्रोफेसर प्रकाश कांडपाल ने उत्तराखंड के वैश्विक महत्व पर चर्चा की और उत्तराखंड के मुख्य ऐतिहासिक स्थलों के महत्व को आंकड़ों के साथ प्रस्तुत किया गया।
योगाचार्य यादव ने बताया कि वर्तमान समाज में बिमारियों का मुख्य कारण गाँवों एवं प्रकृति से दूरी बना लेना है, उन्होंने सभी रोगों की दवा मिट्टी, पानी, धूप व हवा बताई, जो कि सिर्फ गाँवों में ही प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। डीएवी विद्यालय गाजियाबाद के डॉ. सदन राय द्वारा बताया गया कि किस प्रकार प्रो. महेश्वर दत्त कांडपाल ने उनकी एवं अपने संपर्क में आने वाले सभी साथियों की आर्थिक-सामाजिक स्तर पर शिक्षा तथा रोजगार उपलब्ध करवाने में मदद की हैं।

विकास खंड स्याल्दे के 91वर्षीय प्रेमगिरि गोस्वामी (राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्तकर्ता) द्वारा पर्यावरण संरक्षण तथा अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर बल दिया। राधा रमन उप्रेती (पूर्व ब्लॉक प्रमुख) स्याल्दे ने बताया गया कि प्रो. कांडपाल के जीवन से प्रेरणा पाकर भविष्य में युवा वर्ग समाज में अपना योगदान दे सकते हैं।
आयोजित सेमीनार के अंतिम चरण में 26 स्थानीय वरिष्ठ एवं विशिष्ट अतिथियों को शॉल एवं 31 सामाजिक कार्यकर्ताओँ एवं युवाओं को प्रशस्ति-पत्र वितरण कर सम्मानित किया गया। सेमिनार के आयोजक डॉ. देवी दत्त कांडपाल, मैनेजिंग ट्रस्टी, एम. आर. फाउंडेशन के द्वारा योगाभ्याश और ध्यान द्वारा शरीर तथा मन को स्वस्थ रखने का आग्रह किया। साथ ही आश्वाशन दिया किपार्वती – मोती सदन में आने वाले समय में योग, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक विज्ञान विषयों पर अनुसंधान कार्य चलता रहेगा।
इस दौरान छेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्तियों में नंदावल्लभ अकोलिया, अध्यक्ष रुद्रेश्वर मंदिर सनडा, बलवंत वसनाल, प्रिंसीपल जी. आई. सी. बसेड़ी, प्रधान – एराडी, डूंगरी, सनडा, श्रीमती दीपा बंगारी, उप-ब्लॉक प्रमुख, स्याल्दे के साथ ही अम्बा दत्त कबड़ाल, रमेश चंद्र कांडपाल, लीलाधर मासीवाल, कांता वल्लभ पपनै, हरी दत्त रिखारी, हर सिंह बंगारी, कृपाल सिंह एवं धरम सिंह नेगी आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण







