ग्राम सिमलधार में सोलर लाइट हटाई गई, रिकॉर्ड न होने से उठा सवाल।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। तहसील भिकियासैंण के पटवारी क्षेत्र बंगोड़ा के ग्राम सिमलधार से सोलर लाइट हटाए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, पंचायती चुनाव के कुछ दिन बाद विकास के लिए यहां सोलर लाइट लगाई गई थी, जिससे ग्रामीणों को काफी राहत मिल रही थी।

इसी बीच पूर्व प्रधान जीवन सिंह द्वारा ब्लॉक ताड़ीखेत में एक आरटीआई दायर की गई, जिसमें पूछा गया कि ग्राम सिमलधार में लगी 10 सोलर लाइट किस योजना के तहत लगाई गई है और उससे संबंधित पूरी जानकारी मांगी गई। यह आवेदन 8 अक्टूबर को भेजा गया था। इसके जवाब में ब्लॉक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उक्त सोलर लाइट न तो ब्लॉक द्वारा लगाई गई है और न ही इसका कोई रिकॉर्ड ब्लॉक में मौजूद है। साथ ही यह भी बताया गया कि यह किसी ग्राम पंचायत के खर्चे से भी नहीं लगाई गई है।

इसके बाद जीवन सिंह ने इस संबंध में जिलाधिकारी को भी पत्र भेजा। मामले के कुछ समय बाद, 9 अप्रैल को गाँव से सोलर लाइट हटा दी गई।

ग्रामीणों का कहना है कि इन लाइटों के हटने से उन्हें नुकसान हुआ है। पहले जहां रात में पर्याप्त रोशनी रहती थी, वहीं अब अंधेरा हो गया है, जिससे जंगली जानवरों, विशेषकर तेंदुए का खतरा बढ़ गया है।

इस संबंध में जब ताड़ीखेत ब्लॉक के बीडीओ से जानकारी ली गई तो उन्होंने भी यही कहा कि सोलर लाइट का उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं है। ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा भी लिखित में दिया गया है कि यह लाइट न तो ग्राम पंचायत के खर्चे से लगाई गई थी और न ही ब्लॉक के माध्यम से। इसलिए ब्लॉक स्तर पर इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं बनती।

उन्होंने बताया कि भविष्य में यदि गाँव में लाइट लगाई जाएगी तो इसके लिए खुली बैठक होगी और ग्राम प्रधान की स्वीकृति के बाद ही कार्य किया जाएगा।

वहीं, इस मामले में ठेकेदार मनराल भिकियासैंण द्वारा जानकारी दी गई कि सोलर लाइट उन्होंने ग्राम प्रधान के कहने पर किराए पर लगाई थी। प्रारंभ में यह लाइट 3 महीने के लिए लगाई गई थी, जिसे बाद में 3 महीने और बढ़ाया गया। उन्हें इसका किराया भी प्राप्त हुआ। इसके बाद ग्राम प्रधान द्वारा आगे लाइट जारी रखने से मना कर दिया गया, जिसके चलते उन्होंने अपनी सोलर लाइट हटा ली।

यह भी कहा गया है, कि यदि भविष्य में ग्राम प्रधान द्वारा सोलर लाइट खरीदी या किराए पर ली जाती है, तो वे दोबारा लाइट लगाने के लिए तैयार हैं।

जब सूत्रों ने ग्राम प्रधान से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन पर इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

आखिर में, अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के ये सोलर लाइट गाँव में कैसे लगाई गई और फिर क्यों हटाई गई। यह मामला जाँच का विषय बन गया है। साथ ही, ग्रामीणों को भी इस दिशा में मिलकर समाधान निकालने की जरुरत है, क्योंकि अंततः इसका नुकसान गाँव को ही उठाना पड़ा है।

जीवन सिंह ने साफ तौर पर कहा है कि लोगों को किस तरह बेवकूफ बनाया जा रहा है। पहले लाइट लगाई फिर हटा दी। इसकी गहनता से जाँच होनी चाहिए।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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