18 वर्षों से चयन प्रोन्नत वेतनमान से वंचित 5000 शिक्षक, सेवा नियमावलियों में फंसा मामला।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। बेसिक संवर्ग से एलटी माध्यमिक संवर्ग में आए लगभग 5000 शिक्षक पिछले 18 वर्षों से चयन प्रोन्नत वेतनमान से वंचित हैं और वर्तमान में 4600 ग्रेड पे पर ही कार्य कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह मामला शिक्षा विभाग की दो अलग-अलग सेवा नियमावलियों (2009 और 2014) के कारण उलझा हुआ है, जिससे समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
शिक्षकों का कहना है कि राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों के आपसी मतभेदों के कारण 26 हजार शिक्षकों की 34 सूत्रीय मांग पत्र में से एक भी मांग का समाधान नहीं हो पाया है। वहीं दूसरी ओर एलटी माध्यमिक संवर्ग में आए शिक्षक चयन प्रोन्नत वेतनमान के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 21 से 24 जून 2024 तक शिक्षा निदेशालय ननूरखेडा में राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच उत्तराखण्ड के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद निदेशालय ने बेसिक संवर्ग के शिक्षकों के लिए एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। प्रस्ताव में बेसिक सेवा को जोड़ते हुए चयन प्रोन्नत वेतनमान देने तथा जिस दिन से शिक्षक एलटी माध्यमिक संवर्ग में आए हैं, उसी दिन से सीनियरिटी देने की बात कही गई थी। इस मामले में किसी प्रकार का न्यायालयीय विवाद भी नहीं बताया जा रहा है।
शिक्षकों का कहना है कि यदि वे बेसिक संवर्ग में प्राथमिक या जूनियर हाईस्कूल में ही रहते तो वहां हेडमास्टर बनते और चयन प्रोन्नत वेतनमान स्वतः मिलता रहता, लेकिन एलटी संवर्ग में आने के बाद उन्हें इसके लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि जूनियर शिक्षक भी सीनियर हो चुके हैं।
इसी मुद्दे को लेकर 26 नवम्बर 2024 को शिक्षा निदेशालय में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक भी हुई थी। बैठक में शिक्षा सचिव, वित्त सचिव, कार्मिक सचिव, डीजी, डायरेक्टर और राजकीय शिक्षक संघर्ष मंच उत्तराखण्ड के अध्यक्ष व महासचिव मौजूद थे। उस दौरान संघर्ष मंच के पदाधिकारियों ने चयन प्रोन्नत वेतनमान न मिलने का मुद्दा उठाया था।
बताया गया कि बैठक में शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों से कारण पूछा था, जिस पर सचिवों ने कहा था कि फाइल शासन में आ चुकी है और एक महीने के भीतर शासनादेश जारी कर दिया जाएगा। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि यह मामला आज भी लंबित है और दो साल बीतने के बाद भी शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
इसी क्रम में 6 मार्च 2026 को राजकीय एलटी समायोजित पदोन्नत शिक्षक संघर्ष मंच उत्तराखण्ड का एक प्रतिनिधिमंडल यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर शिक्षा मंत्री से मिला। इस दौरान शिक्षा मंत्री ने डायरेक्टर डॉ. मुकुल सती से जानकारी ली। बताया गया कि प्रमुख सचिव ने फाइल दोबारा निदेशालय से बनाकर भेजने को कहा है और जैसे ही मिनट प्राप्त होंगे, प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया जाएगा।
इस पर संघर्ष मंच के अध्यक्ष दिगम्बर फुलोरिया ने डायरेक्टर से सवाल किया कि क्या पूर्व में भेजा गया प्रस्ताव गलत था और अब नया प्रस्ताव किस आधार पर बनेगा। इस पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि उस बैठक में राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री भी मौजूद थे, लेकिन उनके द्वारा भी समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
शिक्षकों का कहना है कि यह एकमात्र ऐसी मांग है जिस पर कोई न्यायालयीय विवाद नहीं है। इसके बावजूद समाधान न होने से बेसिक संवर्ग के लगभग 5000 शिक्षकों में रोष है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि राजकीय शिक्षक संघ के चुनाव से पहले चयन प्रोन्नत वेतनमान नहीं दिया गया तो वे राजकीय शिक्षक संघ की सदस्यता से त्यागपत्र दे देंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी और जवाबदेही राजकीय शिक्षक संघ की होगी।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल









