जमीन और पशुधन को अतिक्रमण और गौरक्षा के नाम पर गरीब किसानों, पशुपालकों से छीनकर बड़े पूंजीपतियों को देने की साजिश कर रही है भाजपा सरकार – आनन्द नेगी।
भिकियासैंण। 26 नवम्बर को देश के मजदूर किसान संगठनों राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों से मोदी सरकार द्वारा की गई वादा खिलाफी और जमीन पशुधन से बेदखल करने की नीतियों व कार्यवाहियों के खिलाफ, राष्ट्रीय ट्रेड युनियनों व संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा पूर्व में घोषित प्रतिवाद के तहत तहसील भिकियासैंण में 15 सूत्रीय ज्ञापन उपजिलाधिकारी भिकियासैंण के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मोदी सरकार व राज्य सरकारों को निर्देशित करने हेतु अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी के नेतृत्व में नायब तहसीलदार दिवान गिरी गोस्वामी भिकियासैंण को सौंपा।
ज्ञापन में सभी फसलों के लिए कानूनी रुप से गारंटीकृत खरीद के साथ C2+50% एमएसपी, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने, किसी भी रुप में श्रम का ठेकाकरण या आउटसोर्सिंग न करने, संगठित, असंगठित, स्कीम श्रमिकों और अनुबंध श्रमिकों और कृषि क्षेत्र सहित सभी श्रमिकों के लिए 26000/- रुपये प्रति माह का राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन और 10000/- रुपये प्रति माह पेंशन और सामाजिक सुरक्षा लाभ लागू करने, ऋणग्रस्तता और आत्महत्याओं को समाप्त करने के लिए किसानों और कृषि श्रमिकों के लिए व्यापक ऋण माफी, किसानों और श्रमिकों को कम ब्याज दरों पर ऋण सुविधा सुनिश्चित करने, रक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली सहित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सार्वजनिक सेवाओं का निजीकरण न किया जाएं।
राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइप लाइन (एनएमपी) को खत्म किया जाएं। प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं लगाए जाएं, कृषि पंपों के लिए मुफ्त बिजली, घरेलू उपयोगकर्ताओं और दुकानों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने, डिजिटल कृषि मिशन (डीएएम), राष्ट्रीय सहयोग नीति और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ आईसीएआर समझौते न किए जाएं जो राज्य सरकारों के अधिकारों का अतिक्रमण करते हैं, और कृषि के निगमीकरण को बढ़ावा देते है, अंधाधुंध भूमि अधिग्रहण को समाप्त किया जाएं, एलएआरआर अधिनियम 2013 और एफआरए को लागू करने, सभी के लिए रोजगार और नौकरी की सुरक्षा की गारंटी दिये जाने, मनरेगा में 200 दिन का काम और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दिये जाने, इसे शहरी क्षेत्रों में भी लागू करने, मनरेगा से परिवारों को बाहर करने के फैसले को तुरंत वापस लिये जाने, बकाया मजदूरी का भुगतान करने, फसलों और मवेशियों के लिए व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र बीमा योजना, काश्तकारों को फसल बीमा और सभी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने, मूल्य वृद्धि को रोकने, पीडीएस को मजबूत बनाने, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा सुनिश्चित करने, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु में 10000/- रुपये मासिक पेंशन देने, संसाधनों के लिए अति-धनवानों पर कर लगाने, नजूल व वन भूमि में पीढ़ियों या वर्षों से निवास कर रही गरीब जनता को अतिक्रमण के नाम पर उनके घर-जमीन से बेदखल करने की कार्यवाही पर रोक लगाने, के साथ ही उत्तराखंड में बिखरी जोतें, नाप जमीन में वन एक्ट, भेषज एक्ट, खनन एक्ट, वन्यजीव संरक्षण कानून के चलते व्यवसायिक खेती न कर पाने से पलायन दिनों दिन बढ़ते चले जा रहा है इसलिए पलायन रोकने के लिए अधिकार सम्पन्न अनिवार्य चकबंदी आवश्यक है, जिससे किसान व्यवसायिक खेती कर पाएं, पशुपालन को रोजगारपरक बनाने के लिए गौवंश संरक्षण कानून को निरस्त कर व्यापार पर लगी रोक को हटाने या गौवंश की स्थितिनुसार (लैंडी, बाखड़ी, बैली, बछिया-बछड़ा, बैल, सांड) कीमत सुनिश्चित कर सरकारी खरीद पक्की करें ताकि पशुपालक को अपना कीमती पशु आवारा छोड़ने को बाध्य न होना पड़े।
समाज में सांप्रदायिक विभाजन को रोकने के लिए सख्त कानून बनाना और उनका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना। संविधान में परिकल्पित धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखना, लैंगिक सशक्तिकरण और फास्ट ट्रैक न्यायिक प्रणाली के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा को समाप्त करना, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों सहित सभी हाशिए के वर्गों के खिलाफ हिंसा, सामाजिक उत्पीड़न और जाति-सांप्रदायिक भेदभाव को समाप्त करवाने की मांग की गई है। अन्त में भारत के संविधान में निहित न्याय और समानता के पक्ष में ज्ञापन को तत्काल स्वीकार कर सरकारों को आदेशित करने की अपेक्षा की गई है। ज्ञापन देने वालो में आनन्द सिंह नेगी, श्याम सिंह, प्रकाश शर्मा आदि शामिल रहे।



