“अंग्रेजों भारत छोड़ो” के नारे ने देश को अंग्रेजों की लूट और जुल्म से आज़ाद कराया, अब “कॉर्पोरेट भारत छोड़ो” का नारा कॉर्पोरेट के जुल्म और लूट से दिलाएगा आजादी – आनन्द नेगी।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान के तहत 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजी हुकूमत के जुल्म और लूट के राज को खत्म करने के लिए गांधीजी के नेतृत्व में “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया गया। इसी तर्ज में आज मोदी सरकार के कॉर्पोरेट राज की खुली लूट और आमजन पर जुल्म के खिलाफ “कॉर्पोरेट भारत छोड़ो” का नारा दिया गया है।

इस अवसर पर भिकियासैंण बडियाली तिराहे पर नुक्कड़ सभा को सम्बोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश अध्यक्ष आनन्द सिंह नेगी ने शहिदे आजम भगत सिंह को याद करते हुए कहा, आजादी के लिए हँसकर फाँसी के फंदे को चूमने वाले शहीदे आजम भगत सिंह ने कहा था कि अंग्रेजों की हुकूमत जितनी जल्दी हो समाप्त होनी चाहिए, परन्तु “जब तक आम आदमी की मेहनत को चन्द मुठ्ठी भर लुटेरे लूटते रहेंगे तब तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा, इसका कोई औचित्य नहीं कि लुटेरे वर्तानवी सरमायेदार होंगे या मिले जुले भारतीय होंगे या शुद्ध भारतीय होंगे”।

उन्होंने कहा गोरों की जगह भूरे या काले आ जायेंगे तो भी हमारा संघर्ष जारी रहेगा। नेगी ने कहा कि आज मोदी सरकार धर्म का सहारा लेकर समाज को नफरत घृणा के दलदल में फँसा कर आम जनता को जल, जंगल, जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार से बेदखल करने की जनविरोधी नीतियां बनाकर कॉर्पोरेट के हवाले कर रही है। उन्होंने कहा किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना यानि सी2+50% न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की सिफारिश करने वाले डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को इसी वर्ष में 9 फरवरी 2024 को “भारत रत्न” से नवाजा गया, परन्तु उनकी सिफारिश को दिल्ली के वार्डरों पर तेरह महीने तक चले किसान आन्दोलन में 736 आन्दोलनकारियों के शहादत के बावजूद मोदी सरकार ने स्वामीनाथन कमेटी के सिफारिशानुसार C2+50% एमएसपी, कर्जमाफी, नया विजली विधेयक को रद्द करने, वार्डर पर शहीद किसानों के स्मारक बनाने, शहीद परिवारों को मुवावजा देने का लिखित समझौते को आज तक लागू न कर पूरे किसानों का अपमान किया है, इसीलिए आज कॉर्पोरेट के खिलाफ “कॉर्पोरेट खेती छोड़ो” सार्वजनिक सम्पति से कॉर्पोरेट को बेदखल करो, जल जंगल जमीन, पशुधन, खनिज पर कॉर्पोरेट नियन्त्रण बन्द करो” नारे को पूरे देश में बुलन्द किया जा रहा है।

आज उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र से लगातार बढ़ रहे पलायन पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पूंजीपतियों के लिए जल, जंगल, जमीन, खनिज पर नियन्त्रण के लिए वन एक्ट, वन्य जीव संरक्षण कानून, खनन एक्ट तो पहले ही आ गये थे। वर्ष 2007 में गौवंश संरक्षण अधिनियम बना कर पशुपालकों को पशुपालन से भी बेदखल करने की साजिश कर दी, जिस गौवंश से हमारी गुजर-बसर होती थी यानि गौवंश हमारी आर्थिक रीढ़ के साथ-साथ किसानी में भी सहायक होने से माँ के रुप में मानी जाती थी, अब बैलों, गायों, बछिया – बछड़ों का व्यापार बन्द होने से किसानों की समय पर जुताई नहीं होने से वन्यजीवों से फसलों का नुकसान बढ़ जाने और गौरक्षा कानून के चलते आवारा गौवंश से फसलों के नुकसान के साथ पशुपालकों का नुकसान तथा गौवंश की भी दुर्दशा होने लगी है। आज देश के अन्दर सरकारी लाइसेंस से बड़े-बड़े बीफ निर्यातक बड़े-बड़े कत्लखाने खोलकर भारी मात्रा में बीफ निर्यात करते हैं। नेगी ने आरोप लगाया कि चुनावी बॉन्ड का खुलासा होने से पता चला है, कि भाजपा ‘जो गौरक्षा के नाम पर देश में पशुपालकों को पशुपालन से बेदखल कर, गौवंश की दुर्दशा कर नफरत/घृणा का माहौल बनाकर साम्प्रदायिक तनाव बनाने में लगी है’ को करोड़ों रुपये बीफ कम्पनियों से चुनावी बॉन्ड के रुप में मिला है। नुक्कड़ सभा का संचालन श्याम सिंह ने किया। सभा में प्रकाश चन्द्र, भुवन चन्द्र, महेन्द्र कुमार, आनन्द बिष्ट पधान, श्याम सिंह, मनोहर बिष्ट, शिव सिंह, कमल नाथ, नरेन्द्र प्रसाद आदि शामिल रहे।

रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण

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