पारंपरिक झोड़े के साथ दो दिवसीय “गिरै कौतिक 2025” का हुआ समापन।

भिकियासैंण। पौराणिक संस्कृति को संरक्षित रखने के क्रम में पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक ग्राम सभा चनुली – सरपटा, बासोट में लगने वाले पारंपरिक गिरै कौतिक को पुनर्जीवित करने के सातवें वर्ष के कौतिक का समापन पारंपारिक झोड़े “गिरि खेता भूमि हों, गिरि झम्माको”, “कमला ग्यों खेता झन जाएं, छोरी ग्यों बालि टूटिला के साथ किया गया।

खेलों को समर्पित यह मेला के तहत पहले दिन बहुत-सी शारीरिक, मानसिक खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। आज सभी विजेता प्रतिभागियों को मंच से सम्मानित किया गया। बच्चों के द्वारा मंच पर उत्तराखंड के लोकगीतों पर बहुत सुंदर सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए।

स्थानीय व रानीखेत, बाजपुर, रामनगर से आए दुकानदारों, व्यापारी बंधुओं ने मेले को संरक्षित व भव्य बनाने में अपना सहयोग दिया। कौतिक में आए लोगों द्वारा गर्म कपड़े व प्लास्टिक के सामानों की जमकर खरीददारी की गई। बच्चों द्वारा अपने खेलने के सामान के साथ पॉपकार्न, नमकीन, मूंगफली, पेस्ट्री व अन्य खाने की चीजें खरीदी गई।

नए वर्ष का यह पहला कौतिक होने से लोगों में बहुत उल्लास देखने को मिला। कौतिक के समापन में गिरै कौतिक एवं सांस्कृतिक विकास समिति के अध्यक्ष कृपाल सिंह शीला द्वारा इस कौतिक को संरक्षित किए जाने में अहम भूमिका निभाने वाले समस्त सहयोगियों, स्थानीय लोगों, समस्त सम्मानित प्रबुद्धजनों, युवा साथियों, समस्त व्यापारी बंधुओं का आभार व्यक्त किया गया।

रिपोर्टर- एस. आर. चन्द्रा भिकियासैंण

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