विराट हिंदू सम्मेलन में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता का संकल्प।
अल्मोड़ा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सकल सनातन समिति द्वारा विशाल हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में सज्जन शक्ति को संगठित कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का आवाहन किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देश भर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बाबा हैड़ाखान एवं पनियाली बस्ती वार्ड 38 के लक्ष्मी बैंक्वेट में नवीन भट्ट के संयोजकत्व तथा पूजा लटवाल एवं कमल किशन पांडे के संचालन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रुप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. ब्रिजेश बनकोटी, मातृशक्ति के रुप में गीता दीदी (पतंजलि योगपीठ से संबंध योग प्रशिक्षिका एवं राजकीय सेवारत शिक्षिका), महिला संत दीपा दीदी (प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ध्यान केंद्र की संचालिका), आध्यात्मिक गुरु दण्डी स्वामी शंकर गिरी महाराज (परमाध्यक्ष एवं पीठाधीश्वर सिद्धेश्वर महादेव मंदिर), संत सीताराम बाबा, कथाकार कपिल देव एवं आचार्य सुरेश बहुगुणा उपस्थित रहे।
डॉ. बृजेश बनकोटी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन के उद्देश्य से की गई थी। संघ ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिंदू समाज को संगठित करने के लिए निरंतर कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास कर रहे लोगों को बेनकाब करना होगा। उन्होंने सभी से जाति-पाति से ऊपर उठकर समाज एवं देश की मजबूती हेतु कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों की 100 वर्षों की तपस्या, त्याग एवं सेवा कार्यों के कारण समाज जागृत हो रहा है। उन्होंने परिवार की मजबूती हेतु परिवार में उचित गुणों का विकास, पर्यावरण की सुरक्षा एवं नागरिक कर्तव्यों के पालन का भी आह्वान किया।
शंकर गिरी महाराज ने कहा कि हमें अपनी मातृभूमि और देश के प्राचीन गौरव को बचाने की आवश्यकता है। उन्होंने अनेकता में एकता का संदेश देते हुए कहा कि हम सब एक हैं और समाज को जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समस्त ज्ञान का मूल आधार वेद हैं तथा ईश्वर का वास सर्वत्र है। उन्होंने मन, वचन, कर्म और वाणी से किसी भी प्राण मात्र को कष्ट न पहुंचाने की बात कही, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र प्रयोग का उल्लेख भी किया। उन्होंने भगवान राम द्वारा रामराज्य की स्थापना एवं धर्म रक्षा हेतु धनुष-बाण उठाने का उदाहरण देते हुए कहा कि सनातन वैज्ञानिक शैली पर आधारित है और इसकी रक्षा करना सभी सनातनियों का कर्तव्य है।
महिला वक्ता रेखा ने कहा कि सनातन परंपरा एवं हिंदू धर्म के उत्थान के लिए संगठित होकर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने पंच परिवर्तनों — कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता तथा स्व-आधारित जीवन के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माँ बालक की प्रथम शिक्षिका होती है और वह व्यक्तित्व निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाकर देश के भावी कर्णधारों को राष्ट्र सेवा हेतु तैयार कर सकती है।
हिंदू सम्मेलन में आडर्न पब्लिक स्कूल, पैन्थन व मास्टर स्कूल के छात्र-छात्राओं द्वारा नंदा राजजात यात्रा पर आधारित प्रस्तुति तथा कुमाउनी नृत्य, झोड़ा-चांचरी की सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई।
विराट हिंदू सम्मेलन के दौरान सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सज्जन शक्ति का सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम में नगर प्रचारक प्रभाकर, सह जिला बौद्धिक प्रमुख कमलेश, नगर बौद्धिक प्रमुख मनोज भट्ट, नगर प्रचार प्रमुख डॉ. नवीन शर्मा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, जिला पंचायत अध्यक्ष दीपा दर्मवाल, प्रमोद तोलिया, बेला तोलिया, सुरेश भट्ट, जिला पंचायत सदस्य डॉ. छवि काण्डपाल, प्रमोद बोरा, नीरज पांडेय, मुकेश रघुवंशी, दिनेश सुयाल, दयानंद पांडे, बालम सिंह, मोहन सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में समाज की सज्जन शक्ति उपस्थित रही।
अंत में सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरुकता एवं संगठित समाज निर्माण का सामूहिक संकल्प लिया गया।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल




