हल्द्वानी महाविद्यालय में फ्यूचर टेक स्किल्स वर्कशॉप का समापन, पायथन व तकनीकी करियर से रुबरु हुए छात्र।

हल्द्वानी (नैनीताल)। एम.बी. राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय हल्द्वानी के करियर काउंसलिंग सेल एवं डिजिटल ट्रेनिंग लैब द्वारा आयोजित छह दिवसीय “फ्यूचर टेक स्किल्स वर्कशॉप” का उत्साहपूर्ण एवं गरिमामयी समापन हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी कौशलों से सुसज्जित कर उन्हें डिजिटल युग की चुनौतियों एवं अवसरों के प्रति जागरुक बनाना था।

कार्यशाला के अंतिम दिन का मुख्य आकर्षण पायथन (Python) प्रोग्रामिंग एवं उससे जुड़े विविध करियर विकल्पों पर आधारित विशेष सत्र रहा। प्रथम सत्र में विशेषज्ञ वक्ता नवीन सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि पायथन आज के समय में सबसे लोकप्रिय और उपयोगी प्रोग्रामिंग भाषाओं में से एक है, जो अपनी सरल संरचना, पठनीयता और बहुउपयोगिता के कारण तकनीकी जगत में अत्यधिक मांग में है। उन्होंने डेटा साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, वेब डेवलपमेंट तथा ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में पायथन के व्यावहारिक उपयोगों का लाइव प्रदर्शन किया।

प्रायोगिक सत्र में विद्यार्थियों को कोडिंग के मूलभूत सिद्धांतों के साथ-साथ तार्किक सोच (Logical Thinking) एवं समस्या समाधान (Problem Solving) की आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया गया। छात्रों ने स्वयं छोटे-छोटे प्रोग्राम बनाकर सीखने की प्रक्रिया को अनुभवात्मक बनाया, जिससे उनमें आत्मविश्वास एवं तकनीकी दक्षता का विकास हुआ।

द्वितीय सत्र में डिजिटल ट्रेनिंग लैब के करियर विशेषज्ञ गौरव पांडे एवं गौरव रावत ने विद्यार्थियों को तकनीकी क्षेत्र में करियर निर्माण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में केवल पारंपरिक डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि पायथन, डेटा एनालिटिक्स एवं डिजिटल टूल्स जैसे कौशल रोजगार के अवसरों को कई गुना बढ़ा देते हैं। विशेषज्ञों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, एआई डेवलपर, साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ एवं ऑटोमेशन एक्सपर्ट जैसे उभरते करियर विकल्पों पर विस्तार से चर्चा करते हुए आवश्यक स्किल्स, इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट्स एवं सतत सीखने के महत्व पर प्रकाश डाला।

समापन समारोह में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एन.एस. बनकोटी ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान करती हैं। उन्होंने छात्रों को निरंतर सीखते रहने, नवाचार को अपनाने तथा तकनीकी दक्षता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर डॉ. एन.एस. सिजवाली एवं डॉ. नवल किशोर लोहानी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों को अपने कौशल को निरंतर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. जीवन सिंह गढ़िया ने कार्यशाला की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि छह दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों, डिजिटल टूल्स एवं करियर उन्मुख कौशलों का समग्र प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने सभी आमंत्रित विशेषज्ञों, प्राध्यापकों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कार्यशाला में प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता की और अपने अनुभव साझा करते हुए इसे अपने करियर के लिए “मील का पत्थर” बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण से उन्हें न केवल तकनीकी ज्ञान प्राप्त हुआ, बल्कि आत्मविश्वास, समस्या समाधान क्षमता एवं भविष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टिकोण भी विकसित हुआ।

यह कार्यशाला महाविद्यालय के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है, जो विद्यार्थियों को बदलते वैश्विक तकनीकी परिवेश के अनुरुप सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर कार्यरत है।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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