पहाड़ के तीन गाँवों की एक जैसी मजबूरी, डोली और चारपाई के सहारे अस्पताल पहुंचे मरीज।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। बीते 6 और 7 जून 2026 को सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में कहीं चारपाई तो कहीं डोली के सहारे मरीजों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इन घटनाओं ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी क्रम में सल्ट विकासखंड की उप तहसील मछोड़ अंतर्गत जाख ग्राम सभा के पणचुरा तोक से एक मामला सामने आया है। यहां सड़क सुविधा के अभाव में गंभीर रुप से बीमार 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला को ग्रामीणों ने चारपाई के सहारे करीब तीन किलोमीटर दुर्गम पैदल मार्ग से रोड हेड तक पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण समय पर उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे गर्भवती महिलाओं और गंभीर रुप से बीमार लोगों का जीवन अक्सर खतरे में पड़ जाता है।

वहीं दूसरी ओर चमोली जनपद से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई। रविवार को प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला गोमती देवी को ग्रामीणों ने डंडी (डोली) के सहारे करीब पाँच किलोमीटर पैदल चलकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल पहुंचाया। सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

जनपद के ही डाव गाँव में शनिवार को 36 वर्षीय रणजीत सिंह अचानक बीमार हो गए। ऐसे में ग्रामीणों ने उन्हें चारपाई के सहारे लगभग छह किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क खेतगदेरा तक पहुंचाया। इसके बाद 108 एम्बुलेंस सेवा की सहायता से उन्हें कर्णप्रयाग उप जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।

उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है और यहां की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की अपनी चुनौतियां हैं। हालांकि राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं और इस दौरान मैदानी तथा तलहटी क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज रही है। पर्यटन के क्षेत्र में भी राज्य ने नई पहचान बनाई है, लेकिन अनेक दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति यह दर्शाती है कि विकास की मुख्यधारा अभी भी कई गाँवों तक नहीं पहुंच सकी है। सड़क, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को आज भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

विडंबना यह है कि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण भी चमोली जनपद में स्थित है, जिसकी दूरी इन ग्रामीण क्षेत्रों से बहुत अधिक नहीं है। इसके बावजूद कई गाँव आज भी आधारभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। शासन-प्रशासन द्वारा विकास के अनेक दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई गाँव अब भी विकास की मुख्यधारा से दूर दिखाई देते हैं।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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