भगवान शिव ने शनिदेव के बुरे प्रभाव और कर्मजन्य कष्टों से मुक्ति के लिए लिया पिप्पलाद अवतार।
स्याल्दे/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। जय महाकाल सेवा समिति भरसोली द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा के पंचम दिवस के मुख्य यजमान गोपाल सिंह मैठानी एवं उनकी धर्मपत्नी रुकमा देवी मैठानी द्वारा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई।
तत्पश्चात कथा व्यास नन्दा वल्लभ पन्त द्वारा शिव महापुराण कथा में भगवान शिव के पिप्पलाद अवतार का सुंदर वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि भगवान शिव का पिप्पलाद अवतार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी स्वरचा के पुत्र के रुप में हुआ। इस अवतार का मुख्य उद्देश्य मनुष्यों को शनिदेव के बुरे प्रभावों और कर्मजन्य कष्टों से मुक्ति दिलाना था।
कथा व्यास ने बताया कि उनका नाम पिप्पलाद इसलिए पड़ा, क्योंकि वे केवल पीपल के पत्ते और फल खाकर जीवित रहे थे। कथा के दौरान भगवान शिव के पिप्पलाद अवतार से जुड़ी कथा का श्रद्धालुओं के समक्ष सुंदर वर्णन किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष प्रताप सिंह ड़गवाल, महेन्द्र सिंह बंगारी, रामदत्त दत्त ढौंडियाल, बालम सिंह बंगारी, कैलाश ढौंडियाल, हीरा सिंह बंगारी, कुन्दन सिंह महेत्ता, लक्की प्रताप सिंह बंगारी, खुशहाल सिंह बंगारी, इंद्र सिंह महेरा, बचें सिंह बंगारी, मनोज चन्द्र जोशी आदि सहयोगी जुटे रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल













