नवजात शिशु की जान बचाने के लिए 108 कर्मियों ने खुद काटा सड़क पर गिरा पेड़।
ताड़ीखेत में कार्यरत 108 कर्मियों ने पेश की इंसानियत की मिसाल, अंधेरे और खराब मौसम के बीच रास्ता साफ कर नवजात को पहुंचाया अस्पताल।
रानीखेत (अल्मोड़ा)। फर्ज के साथ इंसानियत का जज्बा हो तो मुश्किल हालात में भी रास्ता निकाला जा सकता है। विगत मंगलवार देर रात ऐसा ही उदाहरण ताड़ीखेत की 108 एंबुलेंस सेवा के ईएमटी कैलाश सिंह कंडारी और चालक मयंक कुमार ने पेश किया। गंभीर हालत में 05 दिन के लाल जी निवासी रानीखेत के नवजात शिशु को रानीखेत अस्पताल से अल्मोड़ा अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस का रास्ता अचानक कठपुड़िया के पास पेड़ गिरने से बंद हो गया। बच्चे की हालत को देखते हुए दोनों कर्मियों ने अपने साहस का परिचय देते हुए किसी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद पेड़ काटकर रास्ता साफ किया और नवजात शिशु को सुरक्षित मेडिकल कॉलेज अल्मोड़ा पहुंचाया।
गंभीर हालत में नवजात को लेकर निकली थी एंबुलेंस:
जानकारी के अनुसार, मंगलवार 1 सितंबर 2026 की देर रात 108 एंबुलेंस को पाँच दिन के नवजात शिशु की तबीयत गंभीर होने पर उसे रानीखेत से अल्मोड़ा ले जाने की जिम्मेदारी मिली थी। मौसम खराब होने के बावजूद ईएमटी कैलाश सिंह कंडारी और चालक मयंक कुमार शिशु व उसके परिजनों को लेकर अल्मोड़ा के लिए रवाना हुए।
कठपुड़िया के पास पेड़ गिरने से बंद हुआ रास्ता:
रात करीब 11 बजे एंबुलेंस कठपुड़िया के पास पहुंची ही थी कि सड़क पर एक पेड़ गिरा मिला। इससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। एंबुलेंस में गंभीर हालत में नवजात होने के कारण दोनों कर्मियों के सामने समय पर अस्पताल पहुंचाने की बड़ी चुनौती थी।
112 पर मदद मांगी, देरी होने पर खुद संभाला मोर्चा:
उन्होंने तत्काल 112 पर मदद के लिए संपर्क किया, लेकिन सहायता पहुंचने में हो रही देरी और नवजात की बिगड़ती हालत को देखते हुए दोनों ने खुद ही रास्ता साफ करने का फैसला लिया। पास के एक मकान से कुल्हाड़ी की व्यवस्था की और अंधेरे व खराब मौसम के बीच सड़क पर गिरे पेड़ को काटना शुरु कर दिया।
काफी मशक्कत के बाद काटा पेड़:
काफी मशक्कत के बाद पेड़ काटकर रास्ता साफ किया गया। इसके बाद एंबुलेंस को आगे बढ़ाया गया और नवजात शिशु को बेस हॉस्पिटल अल्मोड़ा पहुंचाया गया।
108 कर्मियों की तत्परता की हो रही सराहना:
दोनों 108 कर्मियों की इस तत्परता और मानवीय पहल की क्षेत्र में सराहना हो रही है। साथ ही, इस अदम्य साहस का परिचय अन्य स्वास्थ्य विभाग के लोगों को भी लेना चाहिए।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल














