रासायनिक आधुनिकीकरण के पारिस्थितिक प्रभावों पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। डॉ. प्रताप बिष्ट राजकीय महाविद्यालय भिकियासैंण में रसायन विज्ञान एवं जंतु विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्राचार्य प्रो. शर्मिला सक्सेना के निर्देशन में रसायन सप्ताह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर “रासायनिक आधुनिकीकरण का पारिस्थितिक मूल्य: लुप्त होती प्रजातियां और हमारा साझा भविष्य” विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें विद्यार्थियों ने रासायनिक प्रगति, पर्यावरण प्रदूषण तथा जैव विविधता संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संयुक्त संचालन रसायन विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. साविर हुसैन एवं जंतु विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. दयाकृष्ण ने किया। कार्यक्रम का उद्देश्य रासायनिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने तथा विद्यार्थियों में जैव विविधता के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना रहा।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बताया कि रासायनिक पदार्थों एवं औद्योगिक गतिविधियों के अनियंत्रित उपयोग से वायु, जल और मृदा प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव वन्यजीवों, लाभकारी कीटों तथा अन्य जीव-जंतुओं पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आवासों में बदलाव जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बन रहे हैं। प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव से अनेक प्रजातियों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो रहा है तथा पारिस्थितिक संतुलन और खाद्य शृंखला भी प्रभावित हो रही है।

विद्यार्थियों ने जैविक खेती को बढ़ावा देने, रसायनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरुकता बढ़ाने पर जोर दिया।

रसायन विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. साविर हुसैन ने कहा कि रसायन विज्ञान केवल एक विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन का अभिन्न अंग है। रासायनिक पदार्थों का उपयोग दैनिक जीवन से लेकर कृषि एवं उद्योगों तक व्यापक रुप से होता है। अतः इनका सुरक्षित, संतुलित एवं विवेकपूर्ण उपयोग मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण, दोनों के संरक्षण के लिए आवश्यक है।

जंतु विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ. दयाकृष्ण ने कहा कि रसायनों का अत्यधिक एवं अनियंत्रित प्रयोग जैव विविधता को प्रतिकूल रुप से प्रभावित करता है। इससे लाभकारी जीवों की संख्या में कमी आने के साथ खाद्य शृंखला और पारिस्थितिक संतुलन भी प्रभावित होता है। उन्होंने प्रकृति के संरक्षण तथा सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

भाषण प्रतियोगिता में तानिया मठपाल ने प्रथम, राधा (बीएससी पंचम सेमेस्टर) ने द्वितीय तथा हिमानी (बीएससी प्रथम सेमेस्टर) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. वी.एन. पांडेय एवं अजय पांडेय शामिल रहे।

इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक, कर्मचारी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *