अंकिता भंडारी हत्याकांड: दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल पद से हटाने की मांग।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। अंकिता भंडारी हत्याकांड के संदर्भ में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम के राज्यपाल पद से हटाने और उन्हें जाँच के दायरे में लाने की मांग को लेकर भिकियासैंण में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन उपजिलाधिकारी कार्यालय में कार्यालय सहायक को सौंपा गया। ज्ञापन देने वालों ने आरोप लगाया कि अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े सवालों की अब तक समुचित जाँच नहीं हुई है। उन्होंने दुष्यंत कुमार गौतम को बिना जाँच के राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे महिलाओं के सम्मान को लेकर भाजपा-आरएसएस की सरकार के दावों के विपरीत बताया।
दुष्यंत कुमार गौतम को पद से हटाकर जाँच के दायरे में लाने की मांग:
ज्ञापन में कहा गया कि महामहिम राष्ट्रपति से मांग की गई है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के संदर्भ में दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल पद से बर्खास्त किया जाए, ताकि उन्हें जाँच के दायरे में लाया जा सके। ज्ञापन देने वालों ने आरोप लगाया कि उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त करके किसी भी तरह की जाँच से बचाव का संवैधानिक कवच प्रदान किया गया है। उन्होंने इस नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए तत्काल कार्रवाई और निष्पक्ष जाँच की मांग की।
अंकिता भंडारी हत्याकांड और अदालत के फैसले का किया उल्लेख:
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 18 सितंबर 2022 को पौड़ी जिले के गंगा भोगपुर स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी और उनका शव ऋषिकेश के नजदीक चीला बैराज में फेंक दिया गया था।
इस मामले में भाजपा के दर्जा राज्य मंत्री रह चुके विनोद आर्य के पुत्र पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को अदालत से आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। ज्ञापन में कहा गया कि 30 मई 2025 को अपर सत्र न्यायाधीश, कोटद्वार की अदालत ने फैसला सुनाते हुए लिखा कि वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने से इनकार करने के चलते अंकिता भंडारी की हत्या की गई।
ज्ञापन देने वालों ने फैसले में उल्लेखित ‘स्पेशल सर्विस’ का आशय जिस्मफरोशी से जोड़ते हुए कहा कि वीआईपी से आशय यौन पिपासुओं से है।
वायरल ऑडियो के आधार पर जाँच की मांग:
ज्ञापन में न्यायाधीश के फैसले के उल्लेख के साथ ज्वालापुर (हरिद्वार) से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के वायरल ऑडियो का भी हवाला दिया गया। ज्ञापन के अनुसार, इस ऑडियो में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री एवं उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम तथा भाजपा के तत्कालीन उत्तराखंड संगठन महामंत्री अजेय कुमार को वीआईपी बताया गया है। ज्ञापन देने वालों ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी द्वारा कथित तौर पर स्पेशल सर्विस देने से इनकार किए जाने के कारण उनकी हत्या की गई।
ज्ञापन में इन गंभीर आरोपों की तत्काल जाँच कराने की मांग की गई। साथ ही कहा गया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता और उत्तराखंड के व्यापक जनमानस की मांग पर सीबीआई जाँच का निर्णय लिया गया था, लेकिन दुष्यंत कुमार गौतम और अजेय कुमार को अब तक जाँच के दायरे में नहीं लाया गया है।
ज्ञापन देने वालों ने आरोप लगाया कि दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त कर जाँच से बचाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने उन्हें तत्काल राज्यपाल पद से बर्खास्त कर जाँच के दायरे में लाने और अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।
बडियाली तिराहे पर नुक्कड़ सभा, जनआंदोलन का आह्वान:
ज्ञापन सौंपने से पूर्व बडियाली, भिकियासैंण तिराहे पर नुक्कड़ सभा आयोजित की गई। सभा को भाकपा माले के जिला सचिव आनन्द सिंह नेगी, तुला सिंह तड़ियाल और मदन कठायत ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने भाजपा-आरएसएस की सरकार की जनविरोधी, महिला विरोधी और छात्र-युवा विरोधी नीतियों पर सवाल उठाते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय और जनपक्षीय नीतियों के लिए आवाज उठाने वालों को पुलिस तथा भाजपा-आरएसएस के गुंडों द्वारा चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है। वक्ताओं ने इस कथित तानाशाही रवैये के खिलाफ लोगों से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया।
नुक्कड़ सभा का संचालन श्याम सिंह ने किया।
ज्ञापन सौंपने वालों में भाकपा माले के जिला सचिव आनन्द सिंह नेगी, उत्तराखंड क्रांति दल के मुख्य सलाहकार तुला सिंह तड़ियाल, अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता एवं ग्राम प्रधान मनोहर सिंह, श्याम सिंह, उत्तराखंड आंदोलनकारी मदन कठायत, उत्तराखंड आंदोलनकारी प्रयाग दत्त शर्मा, प्रकाश चन्द्र, कमलनाथ गोस्वामी, नरेंद्र कन्याल, नरेन्द्र सिंह, डुंगर सिंह और कृपाल सिंह सहित अन्य लोग शामिल रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल






