भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा व्यास पूजन एवं गुरु-शिष्य परंपरा विषयक कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन।
हल्द्वानी। शिक्षण मंडल के तत्वावधान में व्यास पूजन एवं गुरु-शिष्य परंपरा पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन राजकीय महाविद्यालय हल्द्वानी शहर, किशनपुर, गौलापार में किया गया।
यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं गुरु-शिष्य परंपरा की पुनर्स्थापना के उद्देश्य से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार ने की। संचालन डॉ. सुरेश जोशी विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर हुआ।

मुख्य वक्ता के रुप में भारतीय शिक्षण मंडल के वरिष्ठ सदस्य अर्जुन बिष्ट ने गुरु-शिष्य परंपरा की ऐतिहासिक महत्ता, सांस्कृतिक गरिमा तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर पश्चिमी प्रभाव के संदर्भ में भारतीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. आशीष उपाध्याय (जिला संयोजक, भारतीय शिक्षण मंडल) ने वैदिक परंपराओं एवं महर्षि वेदव्यास द्वारा प्रतिपादित गुरु-शिष्य संबंधों का सजीव चित्रण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह परंपरा केवल ज्ञान के हस्तांतरण तक सीमित नहीं, बल्कि संस्कार, आचार और जीवन मूल्यों के निर्माण की धुरी है।
कार्यक्रम के समापन पर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने गुरु की भूमिका को केवल शिक्षक न मानकर समाज निर्माता के रुप में स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही छात्र-जीवन में नैतिक, चारित्रिक एवं सामाजिक मूल्यों के समावेश की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु सभी के योगदान की सराहना की गई।
रिपोर्टर- रिया सोलीवाल




























