गौ पालक व रक्षक भगवान कृष्ण ने उठाया गोवर्धन पर्वत।
स्याल्दे/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। नारायण गौ सेवा समिति बिजराण भरसोली द्वारा आयोजित गौ कथा के चतुर्थ दिवस पर आचार्य भानु जोशी द्वारा मुख्य यजमान राजेन्द्र सिंह नेगी एवं उनकी धर्मपत्नी गंगा देवी नेगी, मनमोहन सिंह चौहान एवं उनकी धर्मपत्नी मधु चौहान के माध्यम से विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कराई गई।
तत्पश्चात कथा व्यास आचार्य भास्कर जोशी ने कथा के माध्यम से बताया कि ब्रजवासी पहले इंद्र की पूजा-अर्चना करते थे, जिससे इंद्र को अहंकार हो गया। इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को समझाया कि उन्हें इंद्र के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि यही पर्वत उनकी गौ माताओं को चारा और जीवन का आधार देता है।
कृष्ण की बात को मानकर ब्रजवासियों द्वारा गोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना की गई। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने ब्रज में मूसलाधार बारिश और भयंकर तूफान भेज दिया, जिससे पूरा गोकुल डूब गया।
ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने विशाल गोवर्धन पर्वत को अपने बाएं हाथ की कनिष्ठिका उंगली पर लगातार सात दिन तक उठाकर ब्रजवासियों और गौ माताओं की रक्षा की। इसके बाद इंद्र का घमंड टूटा और उन्होंने भगवान कृष्ण व ब्रजवासियों से क्षमा मांगी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष दलीप सिंह बंगारी, महेन्द्र सिंह बंगारी, बचें सिंह बंगारी, पूरन सिंह रावत, कुन्दन सिंह पालीवाल, बहादुर सिंह मयाल, कैलाश चन्द्र तिवारी व ग्रामवासी शामिल रहे।
रिपोर्टर – रिया सोलीवाल






