राजीव गांधी नवोदय विद्यालय चौनलिया की बदहाली से अभिभावक चिंतित।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। अल्मोड़ा जिले के एकमात्र राजीव गांधी नवोदय विद्यालय चौनलिया की व्यवस्थाओं को लेकर अभिभावकों में चिंता बढ़ती जा रही है। कभी अपनी विशिष्ट शैक्षणिक व्यवस्था और बेहतर सुविधाओं के लिए पहचाने जाने वाले राजीव गांधी नवोदय विद्यालय चौनलिया की वर्तमान स्थिति पर अब सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि जिस उम्मीद और उत्साह के साथ वे अपने बच्चों का प्रवेश इस विद्यालय में कराते हैं, वहां की व्यवस्थाएं देखकर उन्हें निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
भिकियासैंण-भतरौंजखान के मोटर मार्ग के बीच चौनलिया स्थित इस बालक-बालिका संयुक्त विद्यालय में वर्तमान में लगभग पौने तीन सौ से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। अभिभावकों के अनुसार विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के अनुरुप शिक्षकों और अन्य आवश्यक स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए भौतिक विज्ञान के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, जबकि कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए भी विज्ञान विषय के शिक्षक का अभाव बताया जा रहा है। विद्यालय में पुरुष एवं महिला पीटीआई की भी तैनाती नहीं होने की बात सामने आई है।
वहीं विद्यालय के प्रधानाचार्य का पद भी लंबे समय से वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में अभिभावकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि विद्यालय में विद्यार्थियों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियों का संचालन किस तरह प्रभावी ढंग से हो पा रहा है।
विद्यालय की छात्रावास व्यवस्था को लेकर भी अभिभावकों ने गंभीर चिंता जताई है। बताया जा रहा है कि हॉस्टल के कई कमरों के दरवाजे और खिड़कियों में शीशे अथवा जालियां नहीं लगी हैं, जिसके चलते मच्छर और अन्य कीड़े आसानी से कमरों में प्रवेश कर रहे हैं।
इसके अलावा शौचालयों के दरवाजों की कुंडियां भी ठीक से काम नहीं करने की शिकायत सामने आई है।
अभिभावकों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बेहद जरुरी है, लेकिन यदि बुनियादी सुविधाओं की ही स्थिति ठीक नहीं है तो इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है। अभिभावकों के अनुसार इन अव्यवस्थाओं के चलते कई बार बच्चे बीमार भी पड़ जाते हैं।
अभिभावकों के बीच यह चर्चा भी है कि पहले विद्यालय में मुख्य रुप से छठी और नौवीं कक्षा में प्रवेश दिया जाता था, लेकिन अब छठी के अलावा अन्य कक्षाओं में भी प्रवेश दिए जाने लगे हैं।
कुछ अभिभावकों का दावा है कि विद्यालय की व्यवस्थाओं से निराश होकर कई परिवार अपने बच्चों को वापस ले जाने तक को मजबूर हुए हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग या विद्यालय प्रशासन की ओर से किया जाना बाकी है।
विद्यालय की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अभिभावक और क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि विद्यालय के रखरखाव और आवश्यक सुविधाओं के लिए मिलने वाली धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
यदि रखरखाव के लिए बजट उपलब्ध है तो फिर हॉस्टल के कमरों, खिड़कियों, दरवाजों और शौचालयों जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा, यह जाँच का विषय है।
अभिभावकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार देश को विकसित भारत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रही है, लेकिन यदि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी तो उनके भविष्य को बेहतर कैसे बनाया जा सकेगा।
अभिभावकों ने संबंधित विभाग एवं प्रशासन से विद्यालय की व्यवस्थाओं का स्थलीय निरीक्षण कर शिक्षकों एवं आवश्यक स्टाफ की कमी दूर करने, छात्रावास की मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने तथा रखरखाव की व्यवस्था में सुधार करने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर कब तक आवश्यक कदम उठाता है।



