“कब? क्यों? कैसे?” के माध्यम से विज्ञान की जिज्ञासाओं को दर्शाती प्रेरणादायक कविता।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विज्ञान विषय को सरल, रोचक और जिज्ञासापूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती यह कविता विद्यार्थियों और पाठकों को प्रकृति तथा दैनिक जीवन में घटित होने वाली वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को समझने की प्रेरणा देती है। कविता में “कब? क्यों? कैसे?” जैसे प्रश्नों के माध्यम से विज्ञान के महत्व और जिज्ञासा की भावना को प्रभावशाली तरीके से अभिव्यक्त किया गया है। यह रचना प्रगणक कृपाल सिंह शीला द्वारा लिखी गई है।
कब ? क्यों? कैसे ?
विज्ञान सुव्यवस्थित ज्ञान है,
क्रमबद्ध और प्रायोगिक ज्ञान।
जहाँ कब? क्यों? कैसे ? प्रश्न हों,
समझो वही है विशुद्ध विज्ञान।।
कैसे धूमती धरती प्रतिदिन,
कैसे होते दिन और रात।
कैसे मौसम ऋतुएं बदलती,
कैसे होती हवा में बात।।
कैसे बहती ठंड़ी हवा,
कैसे पौधे वृद्धि करते।
पौधे कैसे लेते खाद- पानी,
कैसे हमको ऑक्सीजन देते।।
ठंड में कैसे पानी जमता,
मेंढक कैसे जल थल में रहता।
कैसे दूध से दही है बनता,
लोहे पर कैसे जंग लगता।।
पौधे क्यों कीटों को खाते,
कैसे फूल से फल बन जाते।
कैसे पत्तियाँ अपना खाना बनाते,
जड़ पौधे को कैसे पानी पहुँचाते।।
जीवों का यह विचित्र संसार,
जैव विविधता बहुत अपार।
अपने परिवेश को हम सब जानें,
जन्तुओं वनस्पतियों को पहचानें।।
प्रश्न अनगिनत हम सबके मन में,
आओ पायें उन सबका समाधान।
जानने की जिज्ञासा अगर हो,
तभी सही से समझ पायेंगे विज्ञान।।
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रचनाकार: कृपाल सिंह शीला (स.अ.)
रा.जू.हा. मुनियाचौरा, क्षेत्र – भिकियासैंण (अल्मोड़ा)



