बिनसर महादेव में 19 जून से गूंजेगी श्रीमद्भागवत कथा, श्री विष्णु महायज्ञ का होगा भव्य आयोजन।
रानीखेत/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। श्री स्वर्गाश्रम बिनसर महादेव गीता भवन दत्तात्रेय मंदिर में ब्रह्मलीन नागाबाबा श्री श्री 108 मोहनगिरि महाराज एवं ब्रह्मलीन श्री श्री 108 रामगिरि महाराज की पावन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए श्री विष्णु महायज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ एवं प्रवचन का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए गिरीश कड़ाकोटी ने बताया कि यह धार्मिक आयोजन 19 जून 2026 से प्रारंभ होकर 29 जून 2026 तक चलेगा तथा पूर्णाहुति एवं समष्टि भंडारे के साथ संपन्न होगा। कार्यक्रम का आयोजन श्री बिनसर महादेव पीठाधीश्वर श्री श्री 108 गोवर्धन गिरि महाराज की अध्यक्षता में किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यज्ञाचार्य के रूप में हरिद्वार के पंडित राजेंद्र प्रसाद उपस्थित रहेंगे, जबकि व्यासपीठ पर दिल्ली एवं बदरीनाथ धाम से पधार रहे श्रीमद्भागवत कथा के परम विद्वान आचार्य नागेंद्र तिवारी श्रद्धालुओं को संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराएंगे।
कार्यक्रम के यजमान हुक्कम सिंह कड़ाकोटी तथा तुलसी पांडे होंगे।
धार्मिक आयोजन को लेकर क्षेत्र में अभी से उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। आयोजन की तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो चुकी हैं। बिनसर महादेव क्षेत्र में कथा एवं यज्ञ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं की जा रही हैं। स्थानीय व्यापारियों एवं दुकानदारों ने भी अपनी-अपनी दुकानों एवं प्रतिष्ठानों को व्यवस्थित करना प्रारंभ कर दिया है। आयोजन स्थल के आसपास साफ-सफाई, सजावट एवं आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने का कार्य लगातार जारी है।
कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में पृथ्वी पाल रौतेला, राम सिंह जमनाल, चंद्रशेखर करगेती, वासपानंद ढौंडियाल, हरीश बिष्ट, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, कुंवर सिंह गुसाईं, मोहन सिंह, चंदन सिंह, विकास चन्द्र, धर्मेंद्र कड़ाकोटी, शिवशंकर पालीवाल, एन. डी. शर्मा, राम सिंह, इंदर सिंह कड़ाकोटी, मनोज पवार, ललित गुप्ता, अंबादत्त पंत, हिमांशु पंत, कपिल नेगी तथा केदार सिंह सहित अनेक श्रद्धालु सक्रिय सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
आयोजकों ने समस्त क्षेत्रवासियों एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि वे मानव जीवन का सदुपयोग करते हुए साधु-संतों के दर्शन एवं सत्संग का लाभ प्राप्त करें तथा तन, मन और धन से सहयोग देकर पुण्य के भागी बनें। साथ ही अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर यज्ञ, कथा, सत्संग एवं भंडारे का लाभ प्राप्त कर इस पुण्य कार्य में सहभागी बनें।



