आत्महत्या से पहले सुरेंद्र कोली ने किया आखिरी फोन, रुपयों के दबाव की बताई थी बात।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। निठारी कांड में उच्चतम न्यायालय से दोषमुक्त हुए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली। उसकी मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। आत्महत्या से पहले उसने पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को फोन कर अपनी परेशानी बताई थी।

सुरेंद्र कोली ने बीती रात नारायण सिंह रावत को फोन कर बताया था कि खोखा मुहैया कराने वाला एक किसान नेता उससे किराया बढ़ाने के बाद रुपये देने का दबाव बना रहा है। उसने इस मामले में मदद का आग्रह भी किया था।

19 वर्षों की कानूनी लड़ाई और जीवन में आए बदलावों के बाद सुरेंद्र कोली पिछले माह अपने गाँव विशेष पूजन में शामिल होने आया था। मंगरुखाल स्थित उसका पैतृक मकान पूरी तरह खंडहर हो चुका है। गाँव में उसकी आत्महत्या की खबर पहुंचते ही लोग स्तब्ध रह गए।

पूर्व ग्राम प्रधान जोगा सिंह ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि सुरेंद्र कोली इस तरह अपनी जिंदगी खत्म कर देगा। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र कुशल कारीगर और हुनर का धनी था।

सुप्रीम कोर्ट से रिहा होने के बाद सुरेंद्र कोली कुछ समय दिल्ली में रहा। वहां काम तलाशने के बाद उसने अपना मन बदल लिया और हरिद्वार आ गया। यहां उसने खोखा लेकर आजीविका चलाना शुरु किया। पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत उसके सुख-दुख में मदद करते थे और उन्होंने उसे आर्थिक मदद भी दी थी।

2006 के निठारी हत्याकांड और दुष्कर्म मामले के बाद सुरेंद्र कोली का जीवन पूरी तरह बदल गया। उस समय उसकी पत्नी गर्भवती थी। बेटे के जन्म के बाद वह जेल में उससे मिलने जाती रही। करीब दस वर्ष पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद उसकी पत्नी का हौसला टूटता गया। वर्ष 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उसे उम्रकैद में बदल दिया था।

करीब 2019 में सुरेंद्र की पत्नी सामाजिक तिरस्कार के डर से लगभग 13 वर्षीय बेटे को लेकर गाँव छोड़कर चली गई थी। वह वर्तमान में कहां है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। पत्नी के जाने के बाद सुरेंद्र की माँ कुंती देवी गाँव में अकेली रह गई थीं। वह लगातार कहती थीं कि उनके गरीब बेटे को रसूखदार लोगों ने बलि का बकरा बना दिया। बहू के गाँव छोड़ने के कुछ ही माह बाद कुंती देवी की भी मौत हो गई।

सुरेंद्र कोली के तीन भाइयों में सबसे छोटे भाई आनंद प्राइवेट स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि सुरेंद्र से बड़े भाई चंदन और छोटे भाई मंगत दिल्ली में रहते हैं। निठारी कांड में सुरेंद्र की गिरफ्तारी के बाद तीनों भाइयों ने गाँव से नाता तोड़ लिया था।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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