उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच दिल्ली के तत्वावधान में शुरु हुई कुमाउनी एवं गढ़वाली कक्षाएं।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में संकुल केन्द्र बासोट में कुमाउनी एवं गढ़वाली भाषा की कक्षाएं केन्द्र प्रमुख कृपाल सिंह शीला एवं प्रेम प्रकाश के सहयोग से संचालित की गई। अपनी मातृभाषा एवं दुदबोली कुमाउनी को संरक्षण प्रदान करने तथा इसे अगली पीढ़ी तक हस्तांतरित करने के उद्देश्य से इन कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है।
करीब 15 दिनों तक चलने वाली इन कक्षाओं में बच्चों को अपना परिचय, परिवार के सदस्यों के नाम, कुमाउनी एवं गढ़वाली भाषा में वंदना, प्रार्थना, समूहगान, कविता, कहानी लेखन, गायन-वादन का अभ्यास कराया जाएगा। साथ ही उत्तराखंड के महान व्यक्तित्वों का परिचय, कुमाउनी में वार्तालाप, मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ, हिंदी शब्दों के कुमाउनी और गढ़वाली रुप, यात्रा-वृत्तांत, लोकगीत, लोकगायकों का परिचय, लोककथाएं एवं पारंपरिक खेलों जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी।
प्रथम दिवस की कक्षा में सभी बच्चों का परिचय कुमाउनी भाषा में कराया गया। इसके उपरांत कुमाउनी भाषा शिक्षक प्रेम प्रकाश द्वारा बच्चों से हिंदी शब्दों के कुमाउनी रुपों पर दोतरफा संवाद किया गया। बाद में कुमाउनी वंदना “उत्तराखंड मेरी मातृभूमि” का सामूहिक एवं सुमधुर गायन किया गया। बच्चों को सूक्ष्म जलपान वितरित करने के साथ प्रथम दिवस की कक्षा का समापन हुआ।
इस अवसर पर प्रतिभागी बच्चों में सोम्या, काव्या, तनीषा, पीयूष, आदि कुमार, गौरव चन्द्र, करन, दीपिका, गायत्री, नंदनी वर्मा, देव वर्मा, नयन लोहिया, मयंक बेलवाल, रोहित लोहिया, मोहित नेगी, विवेक ओलिया, मोहित भंडारी, योगेश कड़ाकोटी आदि की सक्रिय सहभागिता रही।
इन कक्षाओं में रा.आ.प्रा.वि. बासोट, आर.सी.एम. पब्लिक स्कूल बासोट, इ.का. बासोट, रा.बा.उ.मा.वि. बासोट तथा रा.जू.हा. सीम के छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं।
कक्षाओं के सफल संचालन हेतु केन्द्र प्रमुख कृपाल सिंह शीला ने संकुल समन्वयक बासोट, सी.आर.पी. न्याय पंचायत बासोट, विद्यालय के प्रधानाध्यापक, समस्त शिक्षकों, कुमाउनी कक्षा शिक्षकों एवं सभी प्रतिभागी बच्चों का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।



