महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता में विश्व एड्स दिवस पर जागरुकता शिविर व स्वच्छता अभियान हुआ आयोजित।
नानकमत्ता (उधम सिंह नगर)। महाराणा प्रताप राजकीय महाविद्यालय नानकमत्ता में विश्व एड्स दिवस पर राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई की ओर से एक दिवसीय जागरुकता कार्यशाला एवं स्वच्छता अभियान का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं महाविद्यालय समुदाय को HIV/AIDS के प्रति वैज्ञानिक, तथ्यपरक और संवेदनशील दृष्टिकोण प्रदान करना तथा समाज में फैली भ्रांतियों और भेदभाव को समाप्त करना था।
प्राचार्य अंजला दुर्गापाल ने दिया वैज्ञानिक सोच का संदेश:
शिविर का शुभारंभ प्राचार्य प्रोफेसर अंजला दुर्गापाल द्वारा किया गया।
उन्होंने कहा कि “विश्व एड्स दिवस हमें जागरुकता, करुणा और वैज्ञानिक सोच का संदेश देता है। एचआईवी/एड्स एक चिकित्सीय स्थिति है, न की किसी व्यक्ति की पहचान या प्रतिष्ठा का प्रश्न। युवा पीढ़ी जागरुकता फैलाकर मिथकों और भेदभाव को समाप्त कर सकती है।”
युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण — डॉ. रवि जोशी:
एन.एस.एस. कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रवि जोशी ने युवाओं की जिम्मेदारी पर विशेष बल देते हुए कहा कि “युवा पीढ़ी समाज में परिवर्तन लाने की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति है। यदि युवा एचआईवी/एड्स के प्रति जागरुक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परिपूर्ण और सुरक्षित व्यवहार के प्रति प्रतिबद्ध हों, तो इस महामारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने एनएसएस स्वयं सेवकों से स्वास्थ्य-साक्षरता के वाहक के रुप में समाज में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।”
स्वास्थ्य शिक्षा सबसे प्रभावी उपाय — डॉ. मीनाक्षी:
एन.एस.एस. सह कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मीनाक्षी ने अपने संबोधन में स्वास्थ्य शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “एड्स जैसी बीमारियों से निपटने के लिए जनजागरुकता सर्वाधिक प्रभावी उपाय है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, सुरक्षित रक्त संक्रमण और सामाजिक जागरुकता ही इसके नियंत्रण की आधारशिला हैं।”
एड्स का सामाजिक-आर्थिक आयाम — प्रो. मृत्युंजय शर्मा:
वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. मृत्युंजय शर्मा ने एड्स के सामाजिक-आर्थिक आयामों पर चर्चा करते हुए कहा कि “यह रोग केवल जैविक संक्रमण नहीं है, बल्कि सामाजिक मिथकों, आर्थिक चुनौतियों और मानसिक अवसाद से भी गहराई से जुड़ा है। समाज को वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए,और मिथकों का साहस पूर्वक खंडन करना चाहिए।”
महिलाओं व किशोरियों पर प्रभाव — डॉ. आशा गढ़िया:
जंतु विज्ञान विभाग प्रभारी डॉ. आशा गढ़िया ने महिलाओं एवं किशोरियों के संदर्भ में एचआईवी/एड्स के प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि “स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, समुचित जन-जागरुकता और लैंगिक संवेदनशील दृष्टिकोण ही सुरक्षित समाज की नींव है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों का दायित्व है कि वे स्वास्थ्य शिक्षा को समावेशी, वैज्ञानिक और सुगम बनाएं। डॉ. गढ़िया ने एड्स की रोकथाम, सावधानियों और सुरक्षित व्यवहार पर व्यावहारिक जानकारी प्रदान की, तथा स्वयं सेवकों के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दिया।”
सामुदायिक सहभागिता का संदेश — डॉ. निवेदिता अवस्थी:
वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. निवेदिता अवस्थी ने सामुदायिक सहभागिता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि “विश्व एड्स दिवस हमें यह याद दिलाता है, कि यह लड़ाई सामूहिक प्रयासों से ही जीती जा सकती है। संस्थान, परिवार, समुदाय और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एकजुट होकर ही इस बीमारी के खिलाफ सुरक्षा कवच तैयार कर सकते हैं।”
स्वच्छता अभियान व समूह गतिविधियाँ:
एक दिवसीय शिविर में परिसर एवं आस-पास स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य परामर्श सत्र तथा समूह चर्चा गतिविधियाँ आयोजित की गई।
शिविर एवं जागरुकता कार्यशाला का संचालन डॉ. मीनाक्षी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो. अंजला दुर्गापाल, कार्यक्रम अधिकारी डॉ. रवि जोशी, डॉ. मीनाक्षी, प्रो. मृत्युंजय शर्मा, डॉ. निवेदिता अवस्थी, डॉ. आशा गढ़िया, डॉ. चंपा टम्टा, डॉ. उमेश जोशी, डॉ. ललित सिंह बिष्ट, डॉ. मंजुलता जोशी, डॉ. निशा परवीन, डॉ. निशा आर्या, डॉ. दर्शन सिंह मेहता, महेश कन्याल, राम जगदीश सिंह, विपिन थापा, सुनील कुमार, छात्र संघ उपाध्यक्ष युवराज सिंह तथा भावना राणा, बेअंत सिंह, मनोज जोशी, परमजीत कौर, अनामिका, अनन्या सहित अनेक प्राध्यापक, कर्मचारी, छात्र संघ पदाधिकारी और एनएसएस स्वयंसेवक उपस्थित रहे।



