देघाट अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल, सामाजिक कार्यकर्ता ने की आवाज उठाने की अपील।

देघाट/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। देघाट घाटी समिति के सामाजिक कार्यकर्ता बालादत्त ढौंडियाल ने देघाट अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए क्षेत्र के युवाओं, जनप्रतिनिधियों और जागरुक नागरिकों से राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर संगठित रुप से आवाज उठाने की अपील की है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में अपने गाँव की एक वृद्ध महिला को उपचार के लिए देघाट अस्पताल ले जाया गया। उनके अनुसार, इमरजेंसी में संपर्क करने के बाद कुछ समय पश्चात एक चिकित्सक पहुंचीं, जिन्होंने मरीज को ऑक्सीजन देने के बाद बिना किसी विस्तृत जाँच के रानीखेत रेफर कर दिया।

बालादत्त ढौंडियाल का आरोप है कि अस्पताल में उपलब्ध एम्बुलेंस की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस में मरीज को स्ट्रेचर पर लेटाने की पर्याप्त सुविधा नहीं थी, जिसके कारण मरीज को बैठाकर ले जाना पड़ा। बाद में मरीज को भिकियासैंण तक पहुंचाया गया, जहां से दूसरी एम्बुलेंस द्वारा ताड़ीखेत ले जाया गया। उन्होंने बताया कि ताड़ीखेत पहुंचने पर दूसरी एम्बुलेंस भी खराब हो गई, जिसके बाद तीसरी एम्बुलेंस की सहायता से मरीज को रानीखेत उप-जिला चिकित्सालय पहुंचाया जा सका।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या क्षेत्र की जनता को देघाट अस्पताल में अनुभवी चिकित्सकों की सेवाएं, प्राथमिक जाँच की सुविधाएं और बेहतर स्थिति वाली एम्बुलेंस उपलब्ध हो पाएंगी।

बालादत्त ढौंडियाल ने कहा कि समाज सेवा केवल राजनीतिक दलों के झंडे और बैनर उठाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आम जनता और जरुरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए भी आवाज उठाई जानी चाहिए। उन्होंने क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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