‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ के तहत ओरिएंटेशन कार्यक्रम का हुआ आयोजन।

भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुणीधार, मानिला में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद (गुजरात) एवं उत्तराखण्ड उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ के अंतर्गत एक दिवसीय उद्यमिता ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी प्राचार्य डॉ. गोरख नाथ ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. जितेन्द्र प्रसाद, नोडल अधिकारी (देवभूमि उद्यमिता योजना) द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन से किया गया। तत्पश्चात नोडल अधिकारी द्वारा मुख्य वक्ता एवं अतिथि, देवभूमि उद्यमिता योजना के डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट ऑफिसर महेन्द्र सिंह रौतेला का स्वागत एवं परिचय कराया गया। साथ ही कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्ष 2023 से प्रदेश के समस्त महाविद्यालयों में इस योजना का संचालन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार, स्टार्टअप एवं स्वरोजगार के प्रति छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर एक सुदृढ़ उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।

इसके उपरांत एक दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत की गई। वक्ताओं ने वर्तमान परिदृश्य में कौशल विकास आधारित ज्ञान, जिसे नई शिक्षा नीति (NEP) में भी स्थान दिया गया है, तथा बाजार की मांग के अनुरुप स्टार्टअप की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रोडक्ट की बिक्री, टिकाऊपन, लाभ, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की बारीकियों एवं सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली विभिन्न वित्तीय सहायता योजनाओं की जानकारी दी गई। स्थानीय सफल उद्यमियों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए प्रशिक्षणार्थियों को ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे स्वयं एवं राज्य की आर्थिकी को सुदृढ़ बना सकें।

मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता महेन्द्र सिंह रौतेला ने पीपीटी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रशिक्षण सत्र प्रारम्भ किया। उन्होंने उत्तराखण्ड, विशेषकर मानिला क्षेत्र के संदर्भ में उपलब्ध संसाधनों, रोजगार के अवसरों तथा देवभूमि उद्यमिता योजना के तृतीय चक्र में किए गए संरचनात्मक सुधारों की जानकारी दी। प्रशिक्षण सत्र के उपरांत छात्र-छात्राओं ने प्रश्न पूछकर अपनी शंकाओं का समाधान किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान छात्रों में उद्यमिता के प्रति उत्साह देखने को मिला।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में एक विशेष परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें सफल प्रतिभागियों को ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ के प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. गोरख नाथ ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में स्टार्टअप के चयन में स्थानीय संसाधनों एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखने पर बल दिया। उन्होंने वन आधारित उद्योगों में संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही मानिला के नैसर्गिक सौंदर्य को देखते हुए पर्यटन उद्योग को एक लाभदायक स्टार्टअप बताते हुए होम-स्टे को स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बताया।

इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न संकायों के प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

रिपोर्टर – रिया सोलीवाल

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