वनाग्नि रोकथाम को लेकर स्याल्दे में चौपाल आयोजित, विशेषज्ञों ने मानव लापरवाही को बताया जंगलों में आग का प्रमुख कारण।
स्याल्दे/भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विकासखंड स्याल्दे सभागार में वनाग्नि रोकथाम को लेकर एक वनाग्नि चौपाल गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में अल्मोड़ा से पहुंचे प्रशिक्षक गजेंद्र पाठक ने बताया कि हमें वनों से अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं और इन लाभों को कायम रखने के लिए वनों को सुरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने वनों की सुरक्षा कैसे की जाए तथा उन्हें आग से कैसे बचाया जाए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। इससे बचाव के लिए समाज को जागरुक होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वनाग्नि के कारण कई गंभीर समस्याएं सामने आती हैं, जिनमें रिहायशी क्षेत्रों में जंगली हिंसक पशुओं का प्रवेश, मानव जीवन पर खतरा तथा खेती को नुकसान प्रमुख हैं।
गोष्ठी में सीतलाखेत मॉडल का उल्लेख करते हुए बताया गया कि चौड़ी पत्ती वाले पेड़ों का रोपण किया जाना चाहिए। मुख्य रुप से बांज, उतीस, बांस, काफल जैसे वृक्ष लगाने से भूमि संरक्षण, जल स्रोतों का संरक्षण, जल चक्र का संतुलन तथा नदियों में जल प्रवाह बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही जल स्रोतों के रिचार्ज होने की संभावना भी बढ़ती है।
जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में बताया गया कि आज मशीनी युग और जंगलों में लगने वाली आग से उत्पन्न धुएं के कारण तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे हिमखंडों के पिघलने, पेड़ों के सूखने जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि गाँव वासियों को अपने-अपने क्षेत्रों में वनों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।
कार्यक्रम में विकासखंड अधिकारी शैलेंद्र जोशी, तहसीलदार सुनील दत्त सिमल्टी, रेंजर उमेश पांडे, प्रधान संगठन अध्यक्ष इंदर सिंह मनराल, भाजपा मंडल अध्यक्ष कुंदन लाल सहित कई प्रधान और सरपंच उपस्थित रहे।



