पौराणिक रीठा महादेव मंदिर में देवी भागवत महापुराण कथा का हुआ आयोजन।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। विकासखंड भिकियासैंण के श्री रीठेश्वर महादेव मंदिर उड़ुली में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ जारी है। कथा के छठे दिन व्यास नंद किशोर जोशी शास्त्री ने माँ भगवती के महत्व पर भगवान विष्णु और माता कौशल्या के मध्य हुए संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया।
तीन विकासखंडों एवं तहसीलों भिकियासैंण, द्वाराहाट और ताड़ीखेत के सीमांत क्षेत्र में स्थित रीठा महादेव नामक तीर्थस्थल, जिसे कुमाऊँनी भाषा में तिथाण (शमशान घाट) भी कहा जाता है, में पौराणिक शिव मंदिर सहित अनेक देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं। मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रीमद् देवी भागवत महापुराण का आयोजन किया जा रहा है। कथा श्रवण के लिए महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों की बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और प्रतिदिन भीड़ बढ़ती जा रही है।
गगास एवं जाले गाड़ नदियों के संगम पर स्थित यह अत्यंत रमणीय स्थल तीन विकासखंडों और तहसीलों का दूरस्थ क्षेत्र है। अब यह क्षेत्र सड़क मार्ग से जुड़ चुका है। हालांकि सड़क अभी कच्ची है, फिर भी यातायात का आवागमन सुचारु रुप से हो रहा है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य कमलेश सती ने बताया कि दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली सहित अन्य महानगरों में रहने वाले स्थानीय लोग भी इन दिनों अपने गाँव पहुंचे हुए हैं, जिससे गाँवों में विशेष चहल-पहल बनी हुई है।
इस आयोजन के यजमान दंपत्ति खिमेंद्र सती हैं। स्थानीय निवासी एवं व्यवसायी रेबाधर सती ने बताया कि इस वर्ष एक नई मूर्ति की स्थापना के साथ राजा मंदिर में राजा हरुहीत की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा तथा बेताल मंदिर की प्रतिष्ठा भी संपन्न हुई है।
उन्होंने बताया कि यह मंदिर आस-पास के गाँवों चापड़, धारपति, उड़ुली, खैरिया, खनोलिया, भोलाखेत, जाल, जमीनीवार, बौंली, गुदियाद्यो आदि क्षेत्रों के लोगों की श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है।
इस आयोजन में संस्था के मार्गदर्शक रणजीत सिंह, सचिव चंद्रशेखर सती, कोषाध्यक्ष मनोज कुमार तथा भंडारे के आयोजन में नंदन सिंह, जीवन सिंह, गोदावरी देवी, बहादुर सिंह, मठपाल ग्रुप, संजय सती, खिमेंद्र सती, चंदन सिंह, प्रताप सिंह असवाल, भूपेंद्र असवाल, रामदत्त सती, अशोक सती, पंकज खाती, दान सिंह खाती एवं हिमांशु सती सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
समस्त आयोजन एवं यज्ञ के संरक्षक महंत हरिदास महाराज हैं, जबकि सहयोगी संस्था के रुप में बद्रीविशाल समाज कल्याण एवं जनसेवा समिति अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।



