भिकियासैंण बाजार में निराश्रित गौवंश से बढ़ी दुर्घटनाओं की आशंका, लोगों में रोष।
भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। नगर पंचायत भिकियासैंण क्षेत्र में सड़कों पर बड़ी संख्या में निराश्रित एवं भटकते गौवंश के घूमने से दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई है। बड़े-बड़े सांडों की मौजूदगी के कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कब कोई व्यक्ति किसी सांड के हमले का शिकार बन जाए, इसका अंदेशा लगातार बना रहता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस समस्या को न तो कोई समाजसेवी गंभीरता से उठा रहा है और न ही कोई गौरक्षक अथवा हिंदूवादी संगठन इस दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। वहीं सरकार की ओर से भी समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी पहल होती नजर नहीं आ रही है।
वर्तमान समय में इसे गौवंश का दुर्भाग्य माना जाए, सरकार की नाकामी या फिर स्वयं गौपालकों की उदासीनता, यह विचारणीय विषय है। क्षेत्र में अच्छी नस्ल की गायों को भी खुले में छोड़ दिया जा रहा है। एक ओर गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग की जाती है, वहीं दूसरी ओर बाजारों और सड़कों पर गौमाता उपेक्षा और दुत्कार का सामना कर रही है।
जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा गौशालाओं के संचालन हेतु प्रति गौवंश प्रतिदिन 80 रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके बावजूद संबंधित गौशालाओं और गौवंश की स्थिति पर पर्याप्त निगरानी नहीं होने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गौशालाएं सरकारी सूची में दर्ज हैं और गौवंश के रखरखाव के लिए धनराशि प्राप्त कर रही हैं, तो सड़कों पर भटक रहे गौवंश को वहां क्यों नहीं रखा जा रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि कहीं यह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित व्यवस्था तो नहीं है, जिसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।
वहीं रिखाड़, सिरकोन और विनायक क्षेत्र में गगास नदी के समीप जिला पंचायत अल्मोड़ा द्वारा एक नई गौशाला का निर्माण कराया जा रहा है। इसी निर्माण कार्य के दौरान कुछ समय पूर्व एक जेसीबी चालक की विद्युत करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। हालांकि इस गौशाला के पूर्ण रुप से तैयार होने में अभी समय लगेगा।
स्थानीय लोग यह भी बताते हैं कि उक्त स्थल के समीप विधायक एवं सांसद निधि से पूर्व में एक गौशाला का निर्माण कराया जा चुका है, जो वर्तमान में बंद पड़ी है। आरोप है कि स्थानीय ग्रामीणों द्वारा उसे संचालित नहीं होने दिया गया। ऐसे में लोगों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि नई गौशाला के निर्माण के बाद उसके सफल संचालन की क्या गारंटी होगी। यदि पुरानी गौशाला का उपयोग नहीं हो पाया, तो नई व्यवस्था का भविष्य भी सवालों के घेरे में रहेगा।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि इन समस्याओं का संज्ञान संबंधित अधिकारी समय रहते क्यों नहीं लेते। उनका मानना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो एक ओर सरकारी धन की बर्बादी जारी रहेगी और दूसरी ओर गौवंश सड़कों पर भटकता रहेगा। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र की जनता में काफी रोष व्याप्त है तथा लोग शीघ्र समाधान की मांग कर रहे हैं।



